
हिमस्खलन के कारण भोर्खड़क से आगे बढ़ना हुआ मुश्किल, तीन पोर्टर और एक कुक सुरक्षित मिले; हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू की तैयारी
- नीरज उत्तराखंडी
उत्तरकाशी। गंगोत्री से केदारताल ट्रेक पर गए दल के फंसने की सूचना के बाद प्रशासन ने रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया है। आपातकालीन परिचालन केंद्र, उत्तरकाशी की 31 अक्टूबर की कार्यवाही आख्या के अनुसार, केदारताल ट्रेक पर गए आठ लोग भोर्खड़क से आगे हिमस्खलन के कारण फंसे हुए हैं। इनमें से एक व्यक्ति के सिर में चोट लगने की सूचना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर को गंगोत्री से सात ट्रेकर्स और छह सपोर्टिंग स्टाफ सहित कुल 13 लोग केदारताल ट्रेक के लिए रवाना हुए थे। इनमें से एक सपोर्टिंग स्टाफ पहले ही गंगोत्री लौट आया था। दल की वापसी 29 अक्टूबर को निर्धारित थी, लेकिन तय समय तक सभी लोग वापस नहीं लौटे।
30 अक्टूबर को हुआ संपर्क, कच्ची ढांग के पास सुरक्षित होने की मिली सूचना
ट्रेकिंग एजेंसी के अनुसार, 30 अक्टूबर को नेटवर्क क्षेत्र में पहुंचने के बाद ट्रेकर्स से फोन पर संपर्क हुआ। उन्होंने स्वयं को कच्ची ढांग के पास सुरक्षित बताया था। हालांकि, वापसी के रास्ते में ग्लेशियर, बर्फ और प्रतिकूल मौसम के कारण आगे बढ़ने में कठिनाई होने की जानकारी देते हुए सहायता के लिए टीम भेजने का अनुरोध किया गया। इसके बाद संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी ने पोर्टर और गाइड की टीम भेजी। टीम ने करीब छह किलोमीटर तक ट्रेक मार्ग खोलने का प्रयास किया, जिसके बाद वह वापस गंगोत्री लौट आई।
NDRF, SDRF और वन विभाग की टीमें रेस्क्यू में जुटीं
31 अक्टूबर को रेस्क्यू अभियान के लिए उत्तरकाशी से NDRF की 10 सदस्यीय टीम सुबह छह बजे गंगोत्री के लिए रवाना हुई, जो गंगोत्री धाम पहुंच चुकी है। वहीं, वन विभाग के दो सदस्यों और संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी के सात सदस्यों सहित नौ लोगों की टीम केदारताल की ओर रवाना की गई। इसके अलावा, SDRF के छह जवानों की टीम सुबह 10 बजे गंगोत्री से केदारताल ट्रेक के लिए रवाना हुई।
तीन पोर्टर और एक कुक सुरक्षित मिले
गंगोत्री नेशनल पार्क के रेंज अधिकारी (RO) से मिली नवीनतम सूचना के अनुसार, गंगोत्री से गई टीम को कच्ची ढांग के आसपास तीन पोर्टर और एक कुक सहित कुल चार लोग सुरक्षित मिले हैं। ये लोग वापसी के दौरान पीछे रह गए थे। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार शेष आठ लोग भोर्खड़क से आगे हिमस्खलन के कारण फंसे हुए हैं। इनमें से एक व्यक्ति के सिर में चोट लगने की सूचना के बाद रेस्क्यू अभियान की गंभीरता और बढ़ गई है।
हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू का अनुरोध
फंसे हुए ट्रेकर्स ने हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू किए जाने का अनुरोध किया है। इसके बाद आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से संबंधित विभागों और अधिकारियों को हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा गया है। प्रशासन की प्राथमिकता रेस्क्यू टीमों को फंसे हुए लोगों तक पहुंचाना, घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना और सभी को सुरक्षित बाहर निकालना है।
ट्रेकिंग दल में शामिल थे सात ट्रेकर्स
कार्यवाही आख्या में उपलब्ध सूची के अनुसार, ट्रेकिंग दल में पश्चिम बंगाल के तपस बाउरी, रतन घोष, मनोज खोवास, रिंटू मंडल और उदय घोष तथा उत्तर प्रदेश की वर्तिका वर्मा और दीपक वर्मा शामिल हैं।
सपोर्टिंग स्टाफ में गाइड सिद्धार्थ राणा तथा कुक अनूप मखलोगा और रोहन राणा का उल्लेख है। पोर्टरों में नेपाल के नयन बहादुर सिंह, हिमाचल प्रदेश के परचंद सिंह, नेपाल के हरि बहादुर शाही और दीपक सिंह शामिल हैं। आख्या के अनुसार, दल के कुछ सदस्य सुरक्षित मिल चुके हैं और गंगोत्री पहुंचने वाले हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रेस्क्यू अभियान और फंसे हुए लोगों की स्थिति में बदलाव होने पर नवीनतम सूचना अलग से जारी की जाएगी।
