बड़कोट की यमुना पंपिंग पेयजल योजना 15 साल से अधर में, चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी इंतजार

 

डेढ़ दशक से बड़कोट को इंतजार, कभी सर्वे तो कभी डीपीआर में उलझी योजना; अब फिर नई डीपीआर अंतिम चरण में

  • हिमांतर ब्यूरो, बड़कोट (उत्तरकाशी)

चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा और करीब डेढ़ दशक का इंतजार। इसके बावजूद बड़कोट नगर की बहुप्रतीक्षित यमुना पंपिंग पेयजल योजना सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है। कभी सर्वे, कभी डीपीआर तो कभी शासन की मंजूरी के फेर में योजना अटकती रही। अब जल निगम से गढ़वाल जल संस्थान पुरोला को योजना हस्तांतरित होने के बाद एक बार फिर नई डीपीआर तैयार की जा रही है। विभाग का दावा है कि डीपीआर अंतिम चरण में है और जल्द शासन को भेज दी जाएगी।

बड़कोट में आबादी बढ़ने के साथ पानी की जरूरत भी बढ़ी है, लेकिन मौजूदा पेयजल स्रोत नाकाफी साबित हो रहे हैं। पुरानी पेयजल योजना के साथ नलकूप से भी आपूर्ति की जा रही है, फिर भी गर्मियों में नलों का हलक सूख जाता है। कई क्षेत्रों में लोगों को पर्याप्त पानी के लिए जूझना पड़ता है। इसी संकट के स्थायी समाधान के लिए यमुना नदी से पानी पंप कर नगर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन वर्षों बाद भी इसकी पाइप धरातल तक नहीं पहुंच सकी।

मुख्यमंत्री बदलते रहे, घोषणा आगे नहीं बढ़ी

स्थानीय लोगों के मुताबिक यमुना पंपिंग योजना की घोषणा अलग-अलग समय पर प्रदेश के चार मुख्यमंत्री कर चुके हैं। सरकारें और मुख्यमंत्री बदलते गए, लेकिन योजना का इंतजार खत्म नहीं हुआ। कभी सर्वे में बदलाव हुआ तो कभी डीपीआर दोबारा तैयार करने की नौबत आई। इसके बाद मामला शासन की स्वीकृति में अटकता रहा।

नगरवासियों का कहना है कि यदि योजना पर घोषणाओं के साथ गंभीरता से काम भी हुआ होता तो डेढ़ दशक बाद बड़कोट पानी के संकट से नहीं जूझ रहा होता।

पानी के लिए डेढ़ महीने सड़क पर रहे लोग

सरकारी इंतजार से परेशान नगरवासी जून 2024 में सड़क पर उतर आए थे। यमुना पंपिंग योजना को मंजूरी दिलाने की मांग को लेकर करीब डेढ़ महीने तक आंदोलन चला। धरना-प्रदर्शन के बीच तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने योजना की स्वीकृति के लिए गंभीर प्रयास का भरोसा दिया था।

आंदोलन को दो साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन योजना आज भी शासन की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है।

अब फिर नई डीपीआर से बंधी उम्मीद

योजना अब जल निगम से गढ़वाल जल संस्थान पुरोला को हस्तांतरित हो चुकी है। इसके बाद नई डीपीआर तैयार की जा रही है। विभाग के अनुसार इसका काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। डीपीआर शासन को भेजे जाने के बाद ही योजना की मंजूरी और निर्माण की तस्वीर साफ हो सकेगी।

लगातार घोषणाओं, सर्वे और डीपीआर का दौर देख चुके नगरवासी इस बार भी उम्मीद के साथ आशंकित हैं। लोगों का सवाल है कि नई डीपीआर योजना को धरातल तक पहुंचाएगी या यह भी सरकारी फाइलों में एक और दस्तावेज बनकर रह जाएगी।

मंजूरी नहीं मिली तो फिर आंदोलन

नगरवासी अजय रावत ने कहा, “चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बावजूद योजना का धरातल पर न उतरना शासन-प्रशासन की बड़ी लापरवाही है। नगरवासी आज भी पर्याप्त और नियमित पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि योजना को जल्द मंजूरी नहीं मिली तो फिर आंदोलन शुरू किया जाएगा।”

डीपीआर जल्द भेजेंगे शासन : पांडेय

गढ़वाल जल संस्थान पुरोला के अधिशासी अभियंता विनोद पांडेय ने बताया कि यमुना पंपिंग पेयजल योजना की डीपीआर अंतिम चरण में है। इसे पूरा कर जल्द शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

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