
20 रुपये की कटोरी, हजारों की आमदनी: पुरोला के बुजुर्ग की मिसाल
- नीरज उत्तराखंडी, पुरोला उत्तरकाशी
पुरोला के महरगांव निवासी 62 वर्षीय वृजमोहन सिंह रावत ने यह साबित कर दिया है कि यदि व्यक्ति में कुछ करने की लगन और स्वावलंबन के संस्कार हों, तो उम्र कभी भी बाधा नहीं बनती.
जब एक ओर पुरोला में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन चल रहा था, वहीं दूसरी ओर बाजार में सड़क किनारे परात में प्राकृतिक बर्फ को जायकेदार बनाकर बेचते वृजमोहन सिंह रावत लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे. वे न केवल स्वाद परोस रहे हैं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे रहे हैं.

जिज्ञासा वश पूछने पर उन्होंने बताया कि वे पुरोला में लगने वाले मेला-जातर में बर्फ बेचकर अच्छा खासा मुनाफा कमा चुके हैं. बर्फ लाना भले ही कठिन होता है, लेकिन मेहनत रंग लाती है. “शाम तक एक हजार से दो से ढाई हजार रुपये की बिक्री हो जाती है,” वे मुस्कुराते हुए बताते हैं.
वृजमोहन रावत सम्पन्न परिवार से होने के बावजूद आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देते हैं. उनका कहना है कि खाली बैठने से बेहतर है कुछ ऐसा काम किया जाए जिसकी बाजार में मांग हो. इसी सोच के साथ उन्होंने पहाड़ी प्राकृतिक बर्फ को मौसमी रोजगार का जरिया बनाया.
वे बताते हैं कि पुरोला की जातर में बर्फ बेचकर वे करीब 50 हजार रुपये तक की कमाई कर चुके हैं, जबकि इन दिनों प्रतिदिन एक से दो हजार रुपये तक कमा रहे हैं. उनकी जायकेदार बर्फ मात्र 20 रुपये प्रति कटोरी उपलब्ध है.
वृजमोहन सिंह रावत आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो बेरोजगारी का रोना रोते हैं या बाजार में निठल्ले घूमते रहते हैं. उनका संदेश साफ है— “काम छोटा या बड़ा नहीं होता, सोच छोटी नहीं होनी चाहिए.”
