रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल की पांच साल की मुहिम के बीच बड़ा घटनाक्रम, किसान अजमेर सिंह चौहान बोले— राकेश उत्तराखंडी की मुहिम हमारे लिए वरदान साबित हुई
राकेश उत्तराखंडी ने उठाई मांग- जौनसार-बावर और देवघार के भूमिहीन मूल निवासी किसानों को नियमानुसार मिले जमीन
- हिमांतर ब्यूरो, पुरटाड़/ विकासनगर
जौनसार-बावर क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की भूमि से जुड़े मामले में आज पुरटाड़ गांव में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। यहां आठ परिवारों ने मकान खाली कर संबंधित जमीन से कब्जा छोड़ दिया। इस घटनाक्रम के बाद भूमि अधिकारों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे किसानों में उम्मीद जगी है। रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी आज मौके पर पहुंचे। उनके साथ किसान अजमेर सिंह चौहान, सियाराम सहित अन्य क्षेत्रवासी भी मौजूद रहे।
जौनसार-बावर की भूमि से जुड़े इस प्रकरण को लेकर रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल पिछले लगभग पांच वर्षों से लगातार आवाज उठा रही है। संगठन की ओर से पुराने राजस्व अभिलेखों, वर्ष 1951-52 तथा वर्ष 1983 के बंदोबस्त रिकॉर्ड और वर्तमान भूमि अभिलेखों की जांच कराने की मांग की जाती रही है।
पुरटाड़ में आठ परिवारों द्वारा मकान खाली किए जाने का घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्र में लगभग 600 से 700 बीघा भूमि से संबंधित शिकायतों को लेकर मामला लगातार चर्चा में है।
अजमेर सिंह चौहान बोले- राकेश उत्तराखंडी की मुहिम किसानों के लिए वरदान साबित हुई
मौके पर मौजूद किसान अजमेर सिंह चौहान ने रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के अभियान की सराहना करते हुए कहा कि राकेश उत्तराखंडी की यह मुहिम चकराता विधानसभा के किसानों के लिए वरदान साबित हुई है।
उन्होंने कहा, “ये लोग पिछले कई वर्षों से हमारी जमीन पर बैठे थे। रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के प्रयासों के कारण आज हमें न्याय मिला है और हमारी जमीन कब्जामुक्त हुई है। इसके लिए हम राकेश उत्तराखंडी के जीवनभर आभारी रहेंगे।”
अजमेर सिंह चौहान के अनुसार, अपनी जमीन के अधिकारों को लेकर लंबे समय से परेशान किसानों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और पुराने राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
राकेश उत्तराखंडी ने शासन-प्रशासन और क्षेत्रवासियों का जताया आभार
रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी ने पुरटाड़ पहुंचकर मौके की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस अभियान में सहयोग देने वाले क्षेत्रवासियों और शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाने में स्थानीय किसानों, क्षेत्रवासियों और प्रशासनिक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है। संगठन पिछले पांच वर्षों से जनजातीय भूमि और किसानों के अधिकारों से जुड़े विषयों को लगातार उठा रहा है।
राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध अभियान चलाना नहीं, बल्कि पुराने राजस्व अभिलेखों की वास्तविक स्थिति सामने लाना और कानून के अनुसार वास्तविक भूमि अधिकारों की रक्षा करना है।
भूमिहीन मूल निवासी किसानों को जमीन देने के लिए बने योजना
राकेश उत्तराखंडी ने जौनसार-बावर और देवघार क्षेत्र में भूमिहीन किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि क्षेत्र के मूल निवासी गरीब किसानों के हितों की रक्षा के लिए शासन को ठोस योजना बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जौनसार-बावर और देवघार क्षेत्र में जो मूल निवासी किसान भूमिहीन हैं, उनके हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद किसी भूमि का आवंटन संभव हो, तो पात्र भूमिहीन मूल निवासी किसानों को नियमानुसार भूमि उपलब्ध कराने की योजना बनाई जानी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के गरीब किसानों को भूमि अधिकारों के मामले में न्याय मिलना चाहिए। शासन को संबंधित कानूनों, पात्रता और उपलब्ध भूमि की स्थिति के आधार पर ऐसी नीति पर विचार करना चाहिए, जिससे जरूरतमंद परिवारों को लाभ मिल सके।
1951-52 और 1983 के बंदोबस्त अभिलेखों की जांच की मांग
जौनसार-बावर क्षेत्र में भूमि से जुड़े विवादों को लेकर पुराने बंदोबस्त अभिलेखों और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड की जांच का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। प्रभावित किसानों का कहना है कि उनकी पूर्वजों की जमीन से संबंधित पुराने और वर्तमान अभिलेखों का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल की ओर से भी मांग की गई है कि जिन मामलों में भूमि का नामांतरण अथवा राजस्व इंद्राज नियमों के विरुद्ध हुआ हो, उनकी सक्षम अधिकारियों से जांच कराई जाए। यदि किसी मामले में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
संगठन का कहना है कि भूमि संबंधी प्रत्येक मामले का निस्तारण उपलब्ध दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर होना चाहिए।
जन, जंगल और जमीन के मुद्दे पर जारी रहेगा संघर्ष
रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल पिछले लगभग पांच वर्षों से ‘जन, जंगल और जमीन’ के मुद्दे पर अभियान चला रही है। संगठन ने इस दौरान प्रभावित किसानों को पुराने दस्तावेज जुटाने और अपनी शिकायतें प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया है।
पुरटाड़ में आठ परिवारों द्वारा मकान खाली किए जाने की घटना को संगठन इस अभियान के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देख रहा है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें भूमि से जुड़े अन्य मामलों की जांच और उनके कानूनी निस्तारण पर टिकी हैं।
राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि संगठन किसानों के अधिकारों की रक्षा और जनजातीय भूमि से जुड़े मामलों में कानून के पालन के लिए आगे भी प्रयास करता रहेगा।
पुरटाड़ का घटनाक्रम एक बार फिर जौनसार-बावर में भूमि अधिकारों, पुराने राजस्व रिकॉर्ड और भूमिहीन मूल निवासी किसानों के हितों को चर्चा के केंद्र में ले आया है।
