किम्मी गांव की बदलेगी तस्वीर, ‘एक मंडी-एक गांव’ योजना में गोद, 70 किसान परिवारों को मिलेगा लाभ

 

बीज से बाजार तक किसानों को मिलेगी मदद, प्रशिक्षण, मृदा परीक्षण, खरीद कैंप और भंडारण की सुविधाओं से बढ़ेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

  • हिमांतर ब्यूरो, नौगांव /उत्तरकाशी

 उत्तराखंड में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में कृषि उत्पादन मंडी समिति नौगांव ने महत्वपूर्ण पहल की है। ‘एक मंडी, एक गांव योजना’ के तहत मंडी समिति ने रवांई घाटी के शून्य प्रतिशत पलायन वाले किम्मी गांव को गोद लिया है। अब मंडी के सहयोग से गांव को आदर्श मंडी गांव के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

इस पहल का उद्देश्य गांव में कृषि एवं बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। योजना के तहत प्रगतिशील किसानों को मॉडल फार्म के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि उनकी सफलता से अन्य किसान भी आधुनिक एवं लाभकारी खेती के लिए प्रेरित हो सकें।

70 परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ

किम्मी गांव के करीब 70 परिवारों की मुख्य आजीविका कृषि एवं बागवानी पर निर्भर है। यहां किसान सेब के साथ टमाटर, मटर, फ्रेंचबीन जैसी नगदी फसलों का उत्पादन करते हैं। मंडी समिति की पहल से इन किसानों को अपनी उपज के बेहतर विपणन और उचित मूल्य के लिए बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी।

योजना के तहत किसानों को उन्नत बीज, फसल प्रबंधन, मृदा परीक्षण, प्रशिक्षण और कृषि संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा किसानों के लिए ऑनलाइन ग्रुप तैयार कर उन्हें बाजार के ताजा भाव, मांग और विपणन संबंधी जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

खेत से बाजार तक मिलेगी सुविधाओं की कड़ी

मंडी समिति की ओर से गांव में खरीद कैंप लगाए जाने के साथ ही किसानों की उपज के भंडारण और बेहतर विपणन की दिशा में भी सहयोग दिया जाएगा। इससे किसानों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और अपनी फसल का बेहतर दाम हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मंडी समिति की यह पहल खास तौर पर नगदी फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि उत्पादन के साथ किसानों को बाजार, भंडारण और मूल्य की सही जानकारी समय पर मिलती है तो ग्रामीण क्षेत्रों में खेती को रोजगार का अधिक मजबूत आधार बनाया जा सकता है।

गांव में पलायन नहीं, अब खेती बनेगी समृद्धि का आधार

किम्मी गांव का शून्य पलायन होना इस पहल को और महत्वपूर्ण बनाता है। ऐसे समय में जब पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को बड़ी चुनौती माना जाता है, किम्मी जैसे गांव में कृषि-बागवानी को मजबूत कर स्थानीय स्तर पर आय और रोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिश ग्रामीण विकास की दिशा में मिसाल बन सकती है।

ग्राम प्रधान प्रताप सिंह ने मंडी समिति की पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे गांव के किसानों को कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मंडी समिति के सहयोग से गांव में कृषि और बागवानी के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी।

प्रस्ताव के आधार पर तैयार हुई जांच रिपोर्ट

मंडी समिति नौगांव के सचिव अजय डबराल ने बताया कि किम्मी गांव को योजना में शामिल करने के लिए ग्राम स्तर से प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। प्रस्ताव के आधार पर विपणन बोर्ड द्वारा जांच रिपोर्ट तैयार की गई, जिसके बाद गांव को योजना के तहत विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है।

उन्होंने बताया कि मंडी समिति का प्रयास रहेगा कि किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए उन्हें फसल उत्पादन, गुणवत्ता, बाजार की मांग, उचित मूल्य और विपणन की पूरी प्रक्रिया से जोड़ा जाए। इससे किम्मी गांव को एक ऐसे मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकेगा, जहां कृषि-बागवानी के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ पलायन रोकने का मजबूत आधार तैयार हो।

नोट: यह फोटो किम्मी गांव की नहीं है यह AIद्वारा बनाई गई है

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