
कृष्ण जन्माष्टमी पर 4 सितंबर को होगा आयोजन, चार पट्टियों के ग्रामीणों ने शुरू की तैयारियां; पर्यटन मानचित्र पर पहचान बनाने की उम्मीद
- नीरज उत्तराखंडी, नौगांव (उत्तरकाशी)
उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल बटर फेस्टिवल की तर्ज पर अब बौख टिब्बा डांडा स्थित रूपनौल सौड़ बुग्याल को भी पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की पहल शुरू हो गई है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर को पहली बार रूपनौल सौड़ बुग्याल में बटर फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर दशगी, भंडारस्यु, बड़कोट और पल्ली मुंगरसन्ति पट्टियों के ग्रामीणों में खासा उत्साह है और तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
वन देवियों की पूजा-अर्चना और स्थानीय लोक परंपराओं के साथ होने वाले इस आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ रूपनौल सौड़ की प्राकृतिक सुंदरता को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाना है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि बटर फेस्टिवल की शुरुआत से बौख टिब्बा क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

3000 मीटर की ऊंचाई पर बसा है रूपनौल सौड़
समुद्रतल से करीब 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रूपनौल सौड़ बुग्याल लगभग डेढ़ किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। बुग्याल के चारों ओर बांज, बुरांश, मोरू, राई और मोरिंडा के घने जंगल इसकी प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। यहां से दिखाई देने वाला हिमालय का विहंगम दृश्य पर्यटकों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित करता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रूपनौल सौड़ केवल प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोक आस्था और परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां बटर फेस्टिवल का आयोजन स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और धार्मिक आस्था को एक मंच पर लाने का प्रयास माना जा रहा है।

बौख टिब्बा को पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा से बढ़ी उम्मीद
रूपनौल सौड़ को पर्यटन से जोड़ने की उम्मीदों को उस समय और बल मिला, जब जुलाई में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बौख नाग मंदिर समिति के अनुरोध पर बौख टिब्बा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। इसके बाद स्थानीय लोगों में क्षेत्र के पर्यटन विकास को लेकर नई उम्मीद जगी है।
अब रूपनौल सौड़ में बटर फेस्टिवल की शुरुआत को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि आयोजन को निरंतरता दी जाती है और बौख टिब्बा क्षेत्र में आधारभूत पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाती हैं तो यह क्षेत्र भविष्य में प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में उभर सकता है।

स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा मंच
सामाजिक कार्यकर्ता चिरंजीवी प्रसाद अवस्थी ने कहा कि रूपनौल सौड़ में पहली बार बटर फेस्टिवल आयोजित होने को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। यह आयोजन स्थानीय संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक विरासत को सामने लाने का अवसर देगा। उन्होंने कहा कि बौख टिब्बा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा के बाद अब स्थानीय स्तर पर भी पहल शुरू हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि रूपनौल सौड़ बुग्याल में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि यहां सड़क, पैदल मार्ग, पेयजल, ठहरने और अन्य जरूरी सुविधाओं का विकास किया जाए तो बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच सकते हैं। इससे स्थानीय उत्पादों, होमस्टे, पशुपालन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
पहली बार आयोजित होने जा रहा यह बटर फेस्टिवल अब केवल एक धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं, बल्कि रूपनौल सौड़ और बौख टिब्बा को पर्यटन के नए गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
