
आयुर्वेदिक उपकेंद्र के सहारे स्वास्थ्य व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सक और तकनीकी स्टाफ
भी नहीं; ग्रामीणों ने मशीन सीएचसी मोरी में लगाने की मांग की
- नीरज उत्तराखंडी, पुरोला
सुदूरवर्ती मोरी क्षेत्र के फिताड़ी गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के बीच जिला योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। गांव में स्वास्थ्य विभाग का अपना एलोपैथिक भवन तक उपलब्ध नहीं है और यहां संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्र भी आयुर्वेदिक है। इसके बावजूद जिला योजना में फिताड़ी गांव में अल्ट्रासाउंड मशीन की खरीद के लिए करीब 25 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किए जाने की बात सामने आई है।
अल्ट्रासाउंड मशीन के संचालन के लिए आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन और उपयुक्त चिकित्सा ढांचा उपलब्ध नहीं होने के कारण यह बजट आवंटन सवालों के घेरे में आ गया है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि मशीन फिताड़ी में स्थापित भी की जाती है तो उसके संचालन और मरीजों को वास्तविक लाभ मिलने को लेकर गंभीर व्यावहारिक अड़चनें सामने आएंगी।
फिताड़ी में एलोपैथिक अस्पताल ही नहीं
फिताड़ी क्षेत्र में वर्तमान में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। गांव में स्वास्थ्य विभाग का ऐसा एलोपैथिक अस्पताल अथवा स्वास्थ्य भवन नहीं है, जहां अल्ट्रासाउंड जैसी जांच सुविधा स्थापित कर उसका नियमित संचालन किया जा सके। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सक और तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता भी बड़ा सवाल है।
ऐसे में करीब 25 लाख रुपये की लागत से अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए बजट स्वीकृत किए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि जिला योजना में प्रस्ताव शामिल करने और स्वीकृति देने से पहले संबंधित विभागों ने मौके की वास्तविक स्थिति का कितना सत्यापन किया।
मशीन की जरूरत मोरी सीएचसी में, जहां पहुंचते हैं 63 गांवों के मरीज
स्थानीय लोगों के अनुसार अल्ट्रासाउंड मशीन की वास्तविक आवश्यकता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी में है। सीएचसी मोरी मोरी क्षेत्र की पंचगाईं, अडोर-बड़ासू, सीगतूर और फतेपर्वत पटियों के करीब 63 गांवों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है।
मोरी तहसील और विकासखंड मुख्यालय होने के कारण यहां आसपास के बड़ी संख्या में ग्रामीण उपचार के लिए पहुंचते हैं। गर्भवती महिलाओं, आपातकालीन मरीजों और गंभीर रोगियों को अल्ट्रासाउंड जैसी जांच के लिए वर्तमान में पुरोला अथवा देहरादून जैसे दूरस्थ स्थानों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में सीएचसी मोरी में अल्ट्रासाउंड सुविधा उपलब्ध होने से बड़ी आबादी को सीधे लाभ मिल सकता है।
‘फिताड़ी में अल्ट्रासाउंड मशीन लगना संभव नहीं’
डिप्टी सीएमओ उत्तरकाशी डॉ. आरसी आर्य के अनुसार फिताड़ी में एलोपैथिक अस्पताल नहीं है। वहां आयुर्वेदिक केंद्र संचालित है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड मशीन के संचालन को लेकर आवश्यक चिकित्सकीय एवं तकनीकी व्यवस्थाओं का होना जरूरी है।
कागजों में योजना, धरातल पर सवाल
फिताड़ी के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन के नाम पर धन आवंटन ने जिला योजना की प्रस्ताव प्रक्रिया और विभागीय सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि किसी चिकित्सा उपकरण की खरीद के लिए बजट स्वीकृत करने से पहले यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित स्थान पर भवन, बिजली, विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी और मरीजों के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
सवाल यह भी है कि यदि फिताड़ी में इन मूलभूत सुविधाओं का अभाव है तो अल्ट्रासाउंड मशीन की खरीद को प्राथमिकता किस आधार पर दी गई।
जनप्रतिनिधियों ने सीएचसी मोरी में मशीन लगाने की मांग की
कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष राजपाल रावत, उप प्रमुख त्रेपन सिंह राणा सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि फिताड़ी के लिए स्वीकृत अल्ट्रासाउंड मशीन को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी में स्थापित किया जाए।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मोरी सीएचसी में मशीन स्थापित होने से फिताड़ी सहित आसपास के दर्जनों गांवों के मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए लंबी और जोखिम भरी यात्रा करने से राहत मिलेगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की जगह उपकरण खरीद पर जोर क्यों?
फिताड़ी प्रकरण ने पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की योजना बनाने के तौर-तरीकों पर भी बहस छेड़ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां स्वास्थ्य केंद्र का भवन, चिकित्सक और तकनीकी स्टाफ तक उपलब्ध नहीं है, वहां महंगी मशीन खरीदने से पहले मूलभूत स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जाना चाहिए।
अब निगाहें शासन-प्रशासन पर हैं कि जिला योजना में फिताड़ी के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन का प्रस्ताव किस विभाग ने रखा, उसका तकनीकी परीक्षण किस स्तर पर हुआ और करीब 25 लाख रुपये के बजट को मंजूरी देने से पहले मौके का सत्यापन किया गया था या नहीं। यदि मशीन फिताड़ी में व्यावहारिक रूप से संचालित नहीं हो सकती, तो इसे सीएचसी मोरी में स्थानांतरित करने का निर्णय ग्रामीण हित में कितना उचित होगा, यह भी अब प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण सवाल है।
