
- नीरज उत्तराखंडी, नौगांव (उत्तरकाशी),
देवराणा घाटी के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को इस वर्ष भी बहुप्रतीक्षित देवराणा पंपिंग पेयजल योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही यह योजना पिछले दो वर्षों से अधूरी पड़ी है, जिसके चलते घाटी के लगभग एक हजार परिवारों को इस गर्मी में भी पेयजल संकट झेलना पड़ेगा।
गर्मी की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में जल संकट गहराने लगा है। बजलाड़ी, पमाड़ी, धारी, तियां, छुड़ी और टेड़ा गांवों में जल स्रोत सूखने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मई की शुरुआत में ही हालात बिगड़ चुके हैं और आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। कई गांवों में लोग दूरस्थ स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि प्रशासन से टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।
दो साल से अधूरी पड़ी योजना
जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रही 14 किलोमीटर लंबी देवराणा पंपिंग पेयजल योजना का उद्देश्य घाटी के कई गांवों तक नियमित पेयजल पहुंचाना था। इस योजना से बजलाड़ी, तियां, धारी, जरड़ा, छुड़ी, टेड़ा, खाबला, नरयुंका, पमाड़ी, मानद गांव और स्योरी फल पट्टी सहित आसपास के क्षेत्रों को लाभ मिलना प्रस्तावित था।
योजना के पूरा होने पर लगभग एक हजार परिवारों को स्थायी पेयजल सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मुख्य पंप हाउस के लिए चयनित भूमि विवादित होने के कारण निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया। मामला न्यायालय में लंबित रहने से परियोजना लंबे समय तक ठप रही।
बिना उपयोग के खड़े ढांचे
योजना के तहत बनाए गए कई ढांचागत निर्माण अब भी बेकार पड़े हैं। सप्लाई टैंक और पाइपलाइन का एक हिस्सा तैयार होने के बावजूद जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना का लाभ धरातल पर नहीं दिख रहा है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य रमेश इंदवाण ने कहा कि विभागीय लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। समय पर योजना पूरी नहीं होने से हर साल गर्मियों में लोगों को पानी के लिए जूझना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के लंबित रहने से न केवल सरकारी धन का नुकसान हुआ है, बल्कि लोगों की उम्मीदें भी टूट रही हैं।
विभाग का दावा – दिसंबर तक आपूर्ति
पेयजल निर्माण निगम के अधिशासी अभियंता मधुकांत कोटियाल के अनुसार योजना में आ रही अधिकांश बाधाओं का समाधान कर लिया गया है। विभाग का दावा है कि दिसंबर 2026 तक योजना से पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
हालांकि, स्थानीय लोग इन आश्वासनों पर पूरी तरह भरोसा नहीं जता पा रहे हैं, क्योंकि पिछले दो वर्षों से समयसीमा लगातार आगे बढ़ती रही है।
हर साल लौट आता है संकट
देवराणा घाटी में पेयजल संकट कोई नई समस्या नहीं है। हर वर्ष गर्मियों में प्राकृतिक स्रोत सूखने लगते हैं, जिससे गांवों में पानी की किल्लत बढ़ जाती है। ऐसे में अधूरी पड़ी पेयजल योजना राहत के बजाय इंतजार का कारण बन गई है।
