
राम नवमी : आइए श्रीराम को जीवन में स्थापित करें!
राम नवमी पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र
शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा
शाश्वत मूल्य बोध के विग्रह स्वरूप श्रीराम भारतीय संस्कृति के एक ऐसे लोक-विश्रुत मानवीय उत्कर्ष हैं जो पढ़े-लिखे और अनपढ़ समाज के हर वर्ग के लिए युगों-युगों से प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं । साहित्य जगत राम-कथा में कल्पना और रस का अजस्र स्रोत ढूंढा है और पिछली पीढ़ियों के कवियों और लेखकों ने अपने सृजन का आधार बनाया । साहित्य की यह परम्परा आज भी अप्रतिहत रूप से चल रही है। इस परंपरा का स्पष्ट संदेश है कि पृथ्वी पर श्रीराम का आविर्भाव और अवतरण मात्र लोक कल्याण के हित हुआ था। उनको अयोध्या के राजा के पुत्र दशरथनंदन के व्याज से मानुष भाव में प्रतिष्ठित करते हुए भारतीय मनीषा मनुष्यता की चुनौतियों, उसके द्वन्द्वों, संघर्षों और उपलब्धियों से परिचित कराते हैं।
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