Tag: मंगसीर बग्वाल

रवांई घाटी में आज से देवलांग पर्व का आगाज़

रवांई घाटी में आज से देवलांग पर्व का आगाज़

उत्तरकाशी
  सांस्कृतिक धरोहर और वीरता की मिसालेंनीरज उत्तराखंडी, पुरोला-उत्तरकाशीरवांई घाटी-अपनी अनूठी लोक परंपराओं, अद्भुत सांस्कृतिक जीवट और देव-अनुष्ठानों के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखने वाला यह पर्वतीय क्षेत्र-आज एक बार फिर देवत्व और लोकश्रद्धा के महासंगम का साक्षी बनेगा. गैर बनाल स्थित प्राचीन रघुनाथ देवता मंदिर परिसर में आज से प्रसिद्ध देवलांग महापर्व का भव्य आयोजन आरंभ हो रहा है, जिसे उत्तराखंड सरकार राजकीय मेला घोषित कर चुकी है. तैयारियाँ चरम पर हैं और श्रद्धालुओं में उत्साह का आलम देखते ही बनता है. मेला समिति की ओर से विशाल भंडारे की भी विशेष व्यवस्था की गई है. मंगसीर की दीपावली: विरासत की अनोखी रोशनी जहाँ देशभर में दीपावली कार्तिक मास में मनाई जाती है, वहीं यहाँ की परंपरा में दीपपर्व एक माह बाद मंगसीर की बग्वाल के रूप में हर्षोल्लास से मनाया जाता है. मान्यता है कि भगव...
उत्तरकाशी : धूमधाम से मनाई गई मंगसीर बग्वाल, इसलिए मनाया जाता है त्योहार

उत्तरकाशी : धूमधाम से मनाई गई मंगसीर बग्वाल, इसलिए मनाया जाता है त्योहार

उत्तराखंड हलचल
उत्तरकाशी: दिपावली के एक महीने बाद ऐतिहासिक मंगसीर दिवाली बनाई जाती है। उत्तरकाशी में सोमवार को धूमधाम से मंगसीर दिवाली मनाई गई।दीवाली के एक महीने बाद उत्तरकाशी में पारम्परिक और ऐतिहासिक दीपावली मनाई जाती है। जिसे मंगसीर बग्वाल के नाम से जाना जाता है। सोमवार को उत्तराकाशी में मंगसीर बग्वाल के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंगसीर बग्वाल गढ़वाल के वीर सेनापति माधो सिंह भंडारी के युद्ध जीतकर घर आने की खुशी में मनाी जाती है। साल 1627-28 के बीच गढ़वाल नरेश महिपत शाह का शासन था। उनके शासनकाल के दौरान गढ़वाल में आकर तिब्बती लुटेरे लूटपाट करते थे। इस पर राजा ने अपने सेनापति को उनसे युद्ध के लिए भेजा। जिसमें माधों सिंह भंडारी की सेना ने तिब्बतियों के छक्के उड़ा दिए। इस एतिहासिक जीत और माधो सिंह भंडारी के घर लौटने की खुशी में राजा के द्वारा मंगसीर बग्वाल मनाई गई। तब से और आज तक ये बग्वाल...