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बेटियां जब ठान लें तो झुकता है आसमान: ‘मशरूम गर्ल’ दीपिका कैंतुरा की प्रेरक कहानी

बेटियां जब ठान लें तो झुकता है आसमान: ‘मशरूम गर्ल’ दीपिका कैंतुरा की प्रेरक कहानी

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला  – 3पहाड़ की मिट्टी से जुड़कर स्वरोजगार की नई इबारत लिख रही हैं उत्तरकाशी की दीपिका कैंतुरा। गांव के खाली और अंधेरे कमरों से शुरू हुआ मशरूम उत्पादन आज एक बड़े उद्यम का रूप ले चुका है। अपनी मेहनत, संकल्प और परिवार के सहयोग से दीपिका ने साबित किया है कि पहाड़ की बेटियां केवल सपने देखती ही नहीं, उन्हें साकार करना भी जानती हैं। पढ़ाई में सामान्य, कक्षा में अक्सर डरी-सहमी रहने वाली, लेकिन चेहरे पर हमेशा मुस्कान लिए एक लड़की ने शायद ही कभी सोचा होगा कि एक दिन उसकी पहचान पूरे क्षेत्र में ‘मशरूम गर्ल’ के रूप में होगी। विद्यालयी जीवन में खेलकूद और सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाली दीपिका कैंतुरा बचपन से ही अपनी अलग पहचान बनाने का हुनर रखती थीं। पढ़ाई में भले ही वह असाधारण नहीं थीं, लेकिन उनकी सक्रियता, सहज स्वभाव और कुछ नया करने की ललक ने उन्हे...
बचपन से देखी गरीबी, जंगल ने पेंटिंग सिखाई और बुरांश ने रंग भरना

बचपन से देखी गरीबी, जंगल ने पेंटिंग सिखाई और बुरांश ने रंग भरना

अभिनव पहल
पहाड़ की बेटियां — एकHimantar Web Deskनव वर्ष पर ‘हिमांतर पत्रिका एवं वेबसाइट’ की विशेष सीरीज़’ ‘पहाड़ की बेटियां’ में हम आपको 24 साल की एक ऐसी प्रतिभावान लड़की की कहानी बता रहे हैं, जो निम्न मध्यवर्गीय परिवार में पैदा हुई और बचपन से ही पहाड़ का संघर्ष देखा एवं उसे अभी भी जी रही है. पर कला के प्रति पूरी तरह से समर्पित है, because और उत्तराखंड की लोक कला ऐपण को देशभर के दूसरे राज्यों की लोक कलाओं के साथ जोड़कर सुंदर कलाकृतियां बना रही है. जिन्हें कला प्रेमी खूब पसंद कर रहे हैं. अभिनय का शौक है. कई कार्यक्रमों के लिए शूट कर चुकी हैं. इस लड़की का नाम है हिमानी कबडवाल.जलविज्ञान बचपन में जंगल की मिट्टी में उकेरती थी कलाकृतियां हिमानी कबडवाल कहती हैं कि उन्हें कलाकार because प्रकृति ने बनाया. जंगल ने पेंटिंग सीखाई. बुरांश ने रंग भरना और चीड़ के पेड़ से लीसा निकालने वाली तकनीक ने ...