
पीढ़ियों पुराने पारंपरिक स्वाद को लोगों तक पहुंचा रही हैं दीपिका डोभाल
नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला – 9पहाड़ और पहाड़ी महिला सदियों से एक दूसरे के पूरक रहे हैं और पहाड़ जैसे कठोर ने अपनी अस्मिता और गौरव के लिए स्त्रियों की कठिन से कठिन परीक्षा भी ली है और उसमें हमेशा पहाड़ जैसी अडिग रहने वाली स्त्रियों ने पहाड़ को कभी झुकने नहीं दिया एक कहावत है ‘पहाड़ की रीढ़ पहाड़ी महिला’ क्योंकि पुरुषों को तो रोजगार के लिए बाहर जाना ही हैं।घर के काम काज,पशुपालन,खेती किसानी में 75 प्रतिशत महिला का श्रम होता है जिसे कभी उस स्तर पर सराहा नहीं गया राज्य निर्माण के समय आंदोलन में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पहाड़ को गौरवान्वित करवा रही है उसने साबित कर दिया है कि महिलाएं सिर्फ चूल्हे चौके के लिए नहीं बनी है उसने करछी से कलम,कलम से लेकर जहाज उड़ाने का सफर,संभव हुआ और परिस्थितियों ने मजबूर किया तो तलवारे भी उठाई और बुलंदियों को छूना हुआ तो सागरमा...
