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शशि कुड़ियाल चंद्रभा: सौम्यता, शक्ति और लेखनी का संगम

शशि कुड़ियाल चंद्रभा: सौम्यता, शक्ति और लेखनी का संगम

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला  – 8"प्रतिभा कभी मंच की मोहताज नहीं होती, बल्कि प्रतिभा होने पर मंच स्वतः ही आपकी तलाश करते हैं और आपके सहयोगी बन जाते हैं।" प्रतिभा कई बार हमें आनुवंशिक रूप से मिलती है तो कुछ लोग अपने हुनर को निखारने के लिए अपने व्यक्तित्व पर निरंतर काम करते हैं। ऐसे लोग समाज में आम जनमानस के बीच एक विशेष पहचान बनाते हैं और अपनी प्रतिभा से एक सकारात्मक संदेश देते हैं। जब प्रतिभा दादा-दादी, नाना-नानी और माता-पिता से विरासत में मिलती है, तो वह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है कि ‘पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं’। इसे लिखते हुए महाभारत का वह प्रसंग अवश्य याद आ जाता है, जब वीर योद्धा अभिमन्यु ने अपनी मां के गर्भ में ही चक्रव्यूह तोड़ने की बात सुन ली थी। यानी प्रतिभा मां के गर्भ से ही संचित होने वाली एक अद्भुत प्रक्रिया है। इसी कड़ी में ‘गर्भधान संस्कार’ का स्मरण भी ...