Tag: ग्वेल देवता

हनुमान अंश… कैंची धाम और अब ग्वेल देवता पर बनी फिल्म के टीजर और पोस्टर ने खींचा ध्यान

हनुमान अंश… कैंची धाम और अब ग्वेल देवता पर बनी फिल्म के टीजर और पोस्टर ने खींचा ध्यान

कला-रंगमंच
 केवल तिवारी समाचार संपादक, दैनिक ट्रिब्यून फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद अब उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम चर्चा में है। वैसे नीम करौली बाबा द्वारा स्थापित इस आश्रम में पिछले डेढ़-दो दशक से श्रद्धालुओं का उमड़ना शुरू हुआ था। इससे पहले 15 जून के आसपास ही यहां लोगों का हुजूम उमड़ता था, क्योंकि इसी दौरान बाबा की जयंती मनाई जाती थी, लेकिन अब उक्त फिल्म के बाद यह क्षेत्र ज्यादा चर्चा में है। इधर, इसी कैंची धाम के चारों ओर एक और आवाज सदियों से गूंजती रहती है। वह है—‘जय ग्वेलज्यू महाराज।’ उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों, खासतौर से पूरे कुमाऊं क्षेत्र में गोलज्यू यानी ग्वेल देवता की सदियों से पूजा होती आ रही है। अनेक गांवों और कस्बों के ये देवता कुल गुरु हैं। ग्वेल देवता या गोलू देवता। स्थानीय भाषा में ग्वेलज्यू, यानी ग्वेल जी। इन्हीं पर अब एक फिल्म आ रही है। फिल्म का नाम है...
कुमाऊंनी लोकसाहित्य में प्रतिबिंबित ग्वेलदेवता का राजधर्म

कुमाऊंनी लोकसाहित्य में प्रतिबिंबित ग्वेलदेवता का राजधर्म

धर्मस्थल
राज्य में किया दबंगई का उन्मूलन, प्रजा को दिलाया इंसाफ का राजडॉ. मोहन चंद तिवारीआज इस लेख के माध्यम से कुमाऊंनी भाषा के लोककवियों के आधार पर उत्तराखंड के न्याय देवता ग्वेलज्यू के राजधर्म की अवधारणा पर चर्चा की जा रही है. कुमाऊं भाषा के जाने माने रंगकर्मी तथा साहित्यकार स्व. श्री ब्रजेन्द्र लाल शाह  जी द्वारा रचित ‘श्रीगोलू-त्रिचालीसा में न्याय देवता ग्वेलज्यू के राजधर्म का भव्य निरूपण हुआ है. महाभारत के शांतिपर्व  में उल्लेख आया है कि राजधर्म में विकृति आने पर  सर्वत्र  समाज में 'मात्स्यन्याय' की प्रवृत्ति फैल जाती है. यानि जैसे बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है.उसी प्रकार अराजकता पूर्ण समाज में भी बाहुबली और धनबली जैसे ताकतवर लोग निर्बल और असहाय लोगों का शोषण करने लगते हैं और उन्हें सताने लगते हैं. कुमाऊं भाषा के जाने माने रंगकर्मी तथा साहित्यकार राज्य संस्था का मकसद ही है इस...