Tag: गाजर घास

पार्थेनियम (Parthenium hysterophorus): एक खतरनाक आक्रामक खरपतवार तथा इसके संभावित लाभकारी पक्ष

पार्थेनियम (Parthenium hysterophorus): एक खतरनाक आक्रामक खरपतवार तथा इसके संभावित लाभकारी पक्ष

खेती-बाड़ी
डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल विज्ञान शिक्षक पी एम श्री कमलाराम नौटियाल राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज, धौंतरी (उत्तरकाशी) (राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी भारत द्वारा उत्कृष्ट विज्ञान शिक्षक सम्मान 2022)सारांश पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस (Parthenium hysterophorus L.), जिसे सामान्यतः गाजर घास, कांग्रेस घास अथवा सफेद टोपी घास के नाम से जाना जाता है, विश्व की सबसे खतरनाक आक्रामक खरपतवारों में से एक है। यह कृषि, जैव विविधता, पशुधन, मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। तीव्र वृद्धि, अत्यधिक बीज उत्पादन तथा विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता के कारण यह विश्व के अनेक देशों में तेजी से फैल चुकी है। यद्यपि इसके दुष्प्रभाव व्यापक हैं, फिर भी हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों ने इसके कुछ संभावित उपयोगों एवं औषधीय गुणों की ओर भी संकेत किया है। प्रस्तुत लेख में पार्थेनियम की ...
विदेशी घास ने पर्वतीय खेती को किया बदहाल

विदेशी घास ने पर्वतीय खेती को किया बदहाल

खेती-बाड़ी
सत्य प्रकाश शर्मा, देहरादून पहाड़ों के खेत-खलिहान और जंगल आज एक अनचाहे बदलाव के गवाह बन रहे हैं. लेन्टाना, कालाबांस, गाजर घास और तिपतिया घास जैसी विदेशी प्रजातियों ने यहाँ के प्राकृतिक परिदृश्य को अपने कब्जे में ले लिया है. ये घासें न सिर्फ तेजी से फैल रही हैं, बल्कि परम्परागत दूधारू घासों को भी लुप्त कर रही हैं, जो कभी पहाड़ी जीवन का आधार हुआ करती थीं. इन घासों के अभाव में पशुपालक अपने जानवरों को सड़कों पर राम भरोसे छोड़ने को मजबूर हैं. खेतों में इन घासों को उखाड़ते-उखाड़ते किसान थक चुके हैं, परेशान हो चुके हैं. फिर भी, अगर हिम्मत जुटाकर खेती को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, तो बन्दरों और सूअरों का आतंक उन्हें पीछे धकेल देता है.समस्याएँ यहीं खत्म नहीं होतीं. जलवायु परिवर्तन ने हालात को और विकट बना दिया है. गर्मियाँ अब पहले जैसी नहीं रहीं. पारा 48 डिग्री के पार पहुँचने की ओर अग्रस...