Tag: कुटकी

जड़ी-बूटी इकोनॉमी को गति देने के लिए सरकार का नया रोडमैप

जड़ी-बूटी इकोनॉमी को गति देने के लिए सरकार का नया रोडमैप

देहरादून
  हिमालय की गोद में उभरता हर्बल क्रांति का नया अध्याय देहरादून. हिमालय की उच्च तराइयों में सदियों से पलती–बढ़ती औषधीय वनस्पतियाँ अब उत्तराखंड के ग्रामीण जीवन, रोजगार और आर्थिकी को एक नई दिशा देने जा रही हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में हुई जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की बैठक में स्पष्ट कहा- “हर्बल और जड़ी-बूटी सेक्टर में नवाचार, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग भविष्य का असली मंत्र है.” राज्य की पहाड़ी मिट्टी में छिपे इस ‘हरी–सोने’ को पहचानकर उसे वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने की योजना अब तेज रफ्तार पकड़ने वाली है.गांवों में हर्बल क्लस्टर: जंगली घास नहीं, अब ब्रांडेड उत्पाद की कहानी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि गांवों में हर्बल क्लस्टर विकसित किए जाएँ, जहाँ किसान केवल कच्ची जड़ी-बूटियाँ न उगाएँ, बल्कि उनका प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग भी स्थानीय स्तर पर हो. इससे खेत...
किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है कुटकी

किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है कुटकी

खेती-बाड़ी
बेहद कड़वी, लेकिन जीवनरक्षक है कुटकीजे. पी. मैठाणीमध्य हिमालय क्षेत्र में भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान के हिमालयी क्षेत्रों में बुग्यालों में जमीन पर रेंगने वाली गाढ़े हरे रंग की वनस्पति है कुटकी. उत्तराखण्ड के हिमालयी क्षेत्र जो अधिकतर 2000 मीटर यानी 6600 फीट से ऊपर अवस्थित हैं उन बुग्यालों में कुटकी पायी जाती हैं. इसका वैज्ञानिक नाम पिक्रोराइज़ा कुरूआ है. यह वनस्पति गुच्छे में उगती है और इसकी जड़ें काली भुरभुरी उपजाऊ भूमि में दूब घास की जड़ों की तरह फैलती है. पौधे की ऊँचाई 8 से 10 इंच तक ही होती है. पत्तियां किनारों पर कटी हुई और फूल सफेद-हल्के बैंगनी गुच्छे में लगते हैं. बीज बेहद बारीक होते हैं. इसलिए बीजों का संग्रहण काफी कठिन होता है. बीज बनने पर स्वतः झड़ जाते हैं और उनसे बसंत ऋतु के साथ-साथ नई पौध तैयार हो जाती है. कुटकी को एक बार रोपित कर देने के बाद उसी पौध से कई...