
बहु उपयोगी और औषधीय गुणों से भरपूर है काला धतूरा
जंगली जानवर नहीं पहुंचाते कोई नुक्सानआलेख एवं फोटो- जे पी मैठाणी
उत्तराखंड के मैदानी भागों में जहां गर्मी बढ़िया पड़ती है - जैसे - देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी, सितारगंज, रुद्रपुर, तराई के अन्य क्षेत्र, ऋषिकेश, रूड़की, लक्सर, हरिद्वार, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, पुरोला, विकासनगर, रामनगर, यमकेश्वर, कर्णप्रयाग, लंगासू, नारायणबगड़, बागेश्वर, गरुड़ आदि मैदानी क्षेत्रों में काले धतूरे की खेती की जा सकती है. अत्यधिक ठण्ड से ये पौधा जाड़ों में सूख जाता है लेकिन अगर जमीन में नमी बनी हुई है तो फिर से वसंत के आने के साथ नयी कोंपलें फूटने लगती हैं.कैसे बनाएं धतूरे की पौध- पेड़ पर ही पूरी तरह से सूख चुके धतूरे के फलों को एकत्र कर लें उनको फोड़कर चपटे - बैंगन के बीजों की तरह ही दिखने वाले धतूरे के बीज बाहर निकल जाते हैं. इन बीजो को एक रात भर पानी में भिगो कर रखें. अगले दिन पानी निठार कर बीजों को हल...
