Tag: श्रीराम

शीशमहल महिला रामलीला: केवट प्रसंग और राम-भरत मिलाप ने दर्शकों को किया भावविभोर

शीशमहल महिला रामलीला: केवट प्रसंग और राम-भरत मिलाप ने दर्शकों को किया भावविभोर

नैनीताल
  एसआरआई संस्था द्वारा आयोजित महिला रामलीला में जब मंच पर उमड़ी आस्था, संवेदना और नारी शक्ति की धाराहिमांतर ब्यूरो, हल्द्वानीहल्द्वानी के शीशमहल काठगोदाम में इन दिनों चल रही एसआरआई (SRI) संस्था की महिला रामलीला सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं, आस्था और नारी सशक्तिकरण का जीवंत उत्सव बन गई है। पांचवें दिन मंचित केवट प्रसंग और राम-भरत मिलाप ने दर्शकों को ऐसा भावविभोर किया कि कई आंखें नम हो उठीं। रामलीला के इस मंच पर जब केवट ने प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराने से पहले उनके चरण धोने की विनम्र जिद की, तो यह दृश्य केवल अभिनय नहीं रहा—यह भक्ति का साक्षात रूप बन गया। केवट के संवादों में समर्पण था, श्रद्धा थी और वह भाव था जो सीधे दर्शकों के हृदय तक पहुंचा। राम नाम की महिमा का गुणगान करते इस प्रसंग ने माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद ...
मुख्यमंत्री ने किया “विकसित भारत-विकसित उत्तराखंड’’ मेगा प्रदर्शनी का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने किया “विकसित भारत-विकसित उत्तराखंड’’ मेगा प्रदर्शनी का शुभारंभ

देहरादून
देहरादून. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को रूड़की के नेहरू स्टेडियम में ’’विकसित भारत-विकसित उत्तराखण्ड’’ मेगा प्रदर्शनी का शुभारंभ किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रदर्शनी में विकसित हो रहे है भारत और उत्तराखंड की अद्भुत और जीवंत छवि को प्रस्तुत किया गया है, यह प्रदर्शनी ऐसा वातावरण प्रस्तुत कर रही है जिसमें हम सभी को एक नए भारत की झलक दिखाई दे रही है. राज्य सभा सांसद नरेश बंसल के प्रयासों से लगाई गई मेगा प्रदर्शनी की खासियत बताते हुए कहा कि डीआरडीओ, इसरो, टीएचडीसी, और भारतीय मानक ब्यूरो के साथ ही अनेक केंद्रीय एजेंसियों द्वारा स्टॉल लगाकर विकसित भारत एवं आत्म निर्भर हो रहे भारत की उपलिब्धयों को इसमें प्रदर्शित किया गया है. राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा भी स्टॉल लगाकर अपने-अपने विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं, कार्यों एवं नवाचारों को प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शाया गया है, इसके...
सीय-राममय सब जग जानी

सीय-राममय सब जग जानी

लोक पर्व-त्योहार
राम नवमी पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  श्रीराम विष्णु के अवतार हैं. सृष्टि के कथानक में भगवान विष्णु के अवतार लेने के कारणों में भक्तों के मन में आए विकारों को दूर करना, लोक में भक्ति का संचार करना, जन – जन के कष्टों का निवारण और भक्तों के लिए भगवान की प्रीति पा सकने की इच्छा पूरा करना प्रमुख हैं. सांसारिक जीवन में मद, काम, क्रोध और मोह आदि से अनेक तरह के कष्ट होते हैं और उदात्त वृत्तियों के विकास में व्यवधान पड़ता है. रामचरितमानस में इन स्थितियों का वर्णन करते हुए गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि जब-जब धर्म का ह्रास होता है, नीच और अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं और अन्याय करने लगते हैं पृथ्वी और वहाँ के निवासी कष्ट पाते हैं तब-तब कृपानिधान प्रभु भाँति-भाँति के दिव्य शरीर धारण कर सज्जनों की पीड़ा हरते हैं. एक भक्त के रूप में तुलसीदास जी का विश्वास है कि सारा जगत राममय है और उनके मन में बसा ...
बहा जननि ज्योतिर्मय निर्झर!

बहा जननि ज्योतिर्मय निर्झर!

लोक पर्व-त्योहार
दीपावली पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्रकहते हैं ‘भारत ’ यह नाम भरत नामक अग्नि के उपासकों के because समुदाय से जुड़ा है. वेदों के व्याख्याकार यास्क ने ‘भारत’ का अर्थ ‘आदित्य’ किया है. ब्राह्मण ग्रंथों में ‘अग्निर्वै भारत:’ ऐसा उल्लेख मिलता है. ‘भारती’ इस शब्द की व्याख्या करते हुए यास्क ‘भारत आदित्य तस्य भा: ‘ भारती वाक् और उससे जुड़े जन भी भारत हुए. ऋग्वेद में स्पष्ट उल्लेख आता है : ‘विश्वामित्रस्य रक्षति ब्रह्मेदं भारतं जनं’. इन सबको देखते हुए प्रकाश के प्रति आकर्षण भारतीय परम्परा में आरम्भ से ही एक प्रमुख आधार प्रतीत होता है. प्रकाश के प्रमुख स्रोत  अग्नि देवता है. गौरतलब है कि अग्नि सबको पवित्र करने वाला ‘पावक’ है और शरीर के भीतर so (जठराग्नि!) और बाहर की दुनिया में बहुत सारे कार्य उसी की बदौलत चलते हैं. यहाँ तक की जल में भी वाड़वाग्नि होती है. आजकल के सुनामी इसे स्पष्टत: प्रदर्शित...