Tag: रंगोत्सव

फाल्गुनी प्रीत का रंगोत्सव: भील संस्कृति का जीवंत पर्व ‘भगोरिया’

फाल्गुनी प्रीत का रंगोत्सव: भील संस्कृति का जीवंत पर्व ‘भगोरिया’

उत्तराखंड हलचल
  भगोरिया पर्व 2026: भील जनजाति का अनोखा प्रेम उत्सव, जानें इतिहास, परंपरा और सांस्कृतिक महत्वमंजू काला, देहरादून जब हवाएँ गर्मी के तेवर दिखाने लगती हैं, जब उनमें मादक खुशबू तैरने लगती है, गीतों में उन्माद भरने लगता है, पत्थर तोड़ने वाले हाथों की उँगलियों पर मेहँदी की लाली सजने लगती है, ताड़ी और महुआ में रस भरने लगता है, टेसू के फूल खिल उठते हैं और वसंत यौवन की सीमा पर पहुँच जाता है, तो समझ लीजिए कि भगोरिया का आगमन हो रहा है। यह भील समुदाय का अपना विशेष त्योहार है, जिसे हम फाल्गुन मास की प्रीत या भगोरिया के नाम से जानते हैं। यह ऐसा पर्व है जो हर युग की नई चमक को अपनी प्राचीन तहजीब और संस्कृति से जोड़ता है। यह न केवल मनुष्य का उत्सव है, बल्कि प्रकृति भी अपने संकेतों, फूलों, हवाओं और रंगों के साथ इसमें शामिल हो जाती है। भगोरिया उन लोगों का त्योहार है जिनकी हड्डियाँ रोज़ाना कठिन श...
इस बार हर्बल रंगों के साथ खेलें होली…

इस बार हर्बल रंगों के साथ खेलें होली…

उत्तराखंड हलचल
ऋषिकेश की ईशा चौहान दे रहीं हैं महिलाओं को हर्बल रंग बनाने का प्रशिक्षण ईशा चौहान द्वारा कई समूह की महिलाओं के साथ स्थानीय महिलाओं को इन रंगों के बारे में उनकी शुद्धता व गुणवत्ता को कैसे बनाए रखना है उसके बारे में बताया गया। उनके द्वारा अभी तक 6 ग्राम संगठन 15 समूह को हर्बल बनाने का निशुल्क प्रशिक्षण दिया गया है और हरिपुर, श्यामपुर, खदरी, गड़ी मयचक के समूह व संगठन के लोग इन रंगों को बनाकर अपनी आजीविका का संवर्धन कर रहे हैं। जिसके लिए महिलाओं को सशक्त कर रोजगार से जोड़ने हेतु उत्तराखंड के राज्यपाल द्वारा सम्मानित भी किया गया चुका है। अभी वर्तमान में नारी शक्ति महोत्सव देहरादून 2024 में उनके द्वारा उत्तराखंड मुख्यमंत्री के समक्ष रिंगाल के प्रोडक्ट बनाने का लाइव प्रसारण भी दिया गया है। जिसके लिए एनआरएलएम ब्लॉक डोईवाला द्वारा सक्रिय महिला के रूप में उन्हें सम्मानित भी किया गया। ईशा चौहान भीमल...
अस्तित्व की व्याप्ति का उत्सव है होली

अस्तित्व की व्याप्ति का उत्सव है होली

लोक पर्व-त्योहार
होली पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  प्रकृति के सौंदर्य और शक्ति के साथ अपने हृदय की अनुभूति को बाँटना बसंत ऋतु का तक़ाज़ा है. मनुष्य भी चूँकि उसी प्रकृति की एक विशिष्ट कृति है इस कारण वह इस उल्लास से अछूता नहीं रह पाता. माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत की आहट मिलती है. परम्परा में वसंत को कामदेव का पुत्र कहा गया है इसलिए उसके जन्म के साथ इच्छाओं और कामनाओं का संसार खिल उठता है. फागुन और चैत्त के महीने मिल कर वसंत ऋतु बनाते हैं. वसंत का वैभव पीली सरसों, नीले तीसी के फूल, आम में मंजरी के साथ, कोयल की कूक प्रकृति सुंदर चित्र की तरह सज उठती है. फागुन की बयार के साथ मन मचलने लगता है और उसका उत्कर्ष होली के उत्सव में प्रतिफलित होता है. होली का पर्व वस्तुतः जल, वायु, और वनस्पति से सजी संवरी नैसर्गिक प्रकृति के स्वभाव में उल्लास का आयोजन है.रंग, गुलाल और अबीर से एक दूसरे को...