देश के पहले लेखक गांव में आयुर्वेद विशेषज्ञों का राष्ट्रीय मंथन, शोध और नवाचार पर जोर

Lekhak Gaon

  • हिमांतर ब्यूरो, देहरादून

देहरादून। हिमालयीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, डोईवाला की ओर से शनिवार को देश के पहले लेखक गांव, थानों में एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘हिम आयु स्पर्श–2026’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय “आयुर्वेद शल्य-शालाक्य तंत्र में नवाचार” रहा, जिसमें देशभर से आए आयुर्वेद विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों और शोधार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ तथा पद्मश्री सम्मानित उत्तर प्रदेश आयुर्वेद विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. के. के. ठकराल ने दीप प्रज्ज्वलन एवं भगवान धन्वंतरि के पूजन के साथ किया।

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संस्था के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार भारद्वाज ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रो. पी. जे. देशपांडे का जीवन और योगदान नई पीढ़ी के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. के. के. ठकराल ने कहा कि आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ना समय की आवश्यकता है। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की संपूर्ण जीवनशैली है। उन्होंने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए नवाचार और शोध को बढ़ावा देने पर बल दिया।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि युवा शोधार्थी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से आयुर्वेद की नई संभावनाओं को सशक्त आधार प्रदान कर सकते हैं और ऐसे सम्मेलन उन्हें नई दिशा देते हैं।

सम्मेलन को आयुर्वेद शल्य चिकित्सा में क्षारसूत्र चिकित्सा पद्धति के प्रणेता प्रो. पी. जे. देशपांडे को समर्पित किया गया। वैज्ञानिक सत्रों में 100 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने आयुर्वेद शल्य एवं शालाक्य तंत्र में नवाचार, अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों के समावेश पर विस्तृत चर्चा की।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार के आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि अनुसंधान आधारित ऐसे सम्मेलन चिकित्सा क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रतिभागी शोधार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया।

इस अवसर पर पूर्व महानिदेशक आयुष प्रो. पूजा भारद्वाज, प्रो. (डॉ.) के. के. पांडेय, प्रो. के. डी. पुरोहित, प्रो. राकेश सुंदरियाल, प्रो. जी. एस. इंदौरिया, प्रो. (डॉ.) बी. आर. त्रिपाठी सहित विभिन्न आयुर्वेदिक शिक्षण संस्थानों से आए शिक्षाविदों, चिकित्सकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. शिशिर, प्रो. निशांत राय जैन, प्रो. रवि जोशी, प्रो. अरविंद, डॉ. अजीत एवं डॉ. सत्येंद्र का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रूपाली, डॉ. सुष्मिता और डॉ. अपेक्षा ने संयुक्त रूप से किया।

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