
सीमांत विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और सैनिकों के मनोबल पर विशेष फोकस
- नीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशी
उत्तराखंड के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हर्षिल क्षेत्र में मंगलवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का दौरा कई मायनों में अहम रहा. इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नागरिक-सैन्य संबंधों को मजबूत करने का स्पष्ट संदेश दिया.
हर्षिल पहुंचने पर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सीडीएस का औपचारिक स्वागत किया और उन्हें जनपद में संचालित विकास योजनाओं एवं प्रशासनिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी.
दौरे का मुख्य आकर्षण ‘हर्षिल सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र’ की आधारशिला रखना रहा. यह केंद्र क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं, गढ़वाल के ऐतिहासिक गौरव और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

सीडीएस ने ‘वाइब्रेंट विलेजेज’ पहल के अंतर्गत स्थानीय ग्रामीणों से भी संवाद किया. उन्होंने सीमांत क्षेत्रों के लोगों की भूमिका को राष्ट्र निर्माण में अहम बताते हुए उनकी सक्रिय भागीदारी की सराहना की. उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांव केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से भी देश की मजबूती के स्तंभ हैं.
इस दौरान जनरल अनिल चौहान ने क्षेत्र में तैनात सैनिकों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया. उन्होंने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम में भी सैनिकों द्वारा निभाई जा रही जिम्मेदारियों की प्रशंसा करते हुए उनकी उच्च स्तरीय ऑपरेशनल तत्परता को सराहा.

अपने दौरे के क्रम में उन्होंने बगोरी गांव का भ्रमण किया, जहां स्थानीय निवासियों से मुलाकात कर सीमांत गांवों की जीवंतता बनाए रखने में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया. इसके बाद उन्होंने मुखवा गांव पहुंचकर प्रसिद्ध मुखवा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और स्थानीय परंपराओं को संजोकर रखने के लिए ग्रामीणों की सराहना की.

यह दौरा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार और सशस्त्र बल सीमावर्ती क्षेत्रों में समेकित विकास, सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और नागरिक-सैन्य सहयोग को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हर्षिल क्षेत्र में इस उच्चस्तरीय दौरे को स्थानीय लोगों ने भी सकारात्मक संकेत के रूप में देखा है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
