
- नीरज उत्तराखंडी, पुरोला
मोरी ब्लॉक के पर्वत क्षेत्र के 22 गांवों में इन दिनों ईष्ट देव सोमेश्वर महाराज के पावन देवगोती मेले की धूमधाम देखने को मिल रही है. यह पारंपरिक मेला 15 गते माघ से पंचगाई अडोर एवं बड़ासु पट्टी के गांवों में विधिवत रूप से प्रारंभ हो गया है.
15 माघ को सोमेश्वर महाराज की डोली को उनकी मूल थाती जखोल गांव स्थित मंदिर से बाहर निकाला गया. इसके साथ ही देवगोती मेला जखोल से आरंभ होकर तीनों पट्टियों के गांव-गांव में भ्रमण करता है. यह मेला कुल 22 दिनों तक 22 गांवों में बड़े ही उल्लास, श्रद्धा और आनंद के साथ मनाया जाता है.
पर्वत क्षेत्र में देवगोती मेला बसंत ऋतु के आगमन और हरियाली उत्सव के प्रतीक के रूप में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है. मेले की तिथियां जखोल के राज पुरोहितों एवं सोमेश्वर महाराज की आज्ञा से निर्धारित की जाती हैं.

22 दिवसीय इस मेले के दौरान सोमेश्वर महाराज की डोलियां क्षेत्रवासियों की कुशलता, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए गांव-गांव भ्रमण करती हैं. मेले के समय देव डोली जखोल गांव में खस्सों के घर विश्राम करती है तथा इसके बाद प्रतिदिन अलग-अलग गांवों में विराजमान होती है.
मेले में 22 गांवों के बाजगी समुदाय द्वारा ढोल-दमाऊ, रणसिंघा, धौंस जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच रातभर नृत्य, देव स्तुति गायन, रासो एवं तांदी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी जाती हैं, जिन पर ग्रामीण श्रद्धा भाव से झूम उठते हैं
इस अवसर पर पूरे क्षेत्र के सीयाणे, बजीर, देवता पुजारी एवं बाजगी मौजूद रहे. मेले में रामध्यान, जैन सिंह, कृपाल सिंह, जनक सिंह सहित कई पुजारी तथा अवतार सिंह, चैन सिंह, गंगा सिंह, विजेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.

