ओलावृष्टि से उत्तरकाशी की यमुना घाटी में फसलों को भारी नुकसान, गंगोत्री-हर्षिल में बर्फबारी

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  • नीरज उत्तराखंडी, नौगांव, उत्तरकाशी

जनपद उत्तरकाशी में सोमवार शाम मौसम ने अचानक करवट ले ली. तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने यमुना घाटी के कई क्षेत्रों में किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया. आराकोट, मोरी, नौगांव, पुरोला और बड़कोट क्षेत्र में करीब आधे घंटे तक हुई तेज ओलावृष्टि से नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. वहीं ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड बढ़ गई है और गंगोत्री व हर्षिल घाटी में हल्की बर्फबारी दर्ज की गई.

यमुना घाटी के नौगांव क्षेत्र की स्योंरी फल पट्टी, पुरोला के भंकोली और बड़कोट के धारी-कलोगी, मोरी के आराकोट बंगाण क्षेत्र सहित कई गांवों में अचानक ओले गिरने से खेतों में खड़ी मटर, गेहूं और सब्जियों की फसलें प्रभावित हुई हैं. ओलों की मार से खासकर मटर की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है. कई जगहों पर मटर की बेलें टूट गईं और तैयार फसल खेतों में बिछ गई.

किसानों के अनुसार टमाटर की तैयार की जा रही नर्सरियों को भी ओलों ने भारी नुकसान पहुंचाया है. इसके अलावा फल पट्टी में सेब, आड़ू, प्लम और खुमानी के पेड़ों पर आए फूल भी बड़ी संख्या में झड़ गए हैं, जिससे आगामी सीजन में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.

स्थानीय काश्तकारों- विरेन्द्र चौहान, किशोर सिंह राणा, हरीश चौहान, विजय बंधानी, जगमोहन सिंह राणा और प्रेम सिंह राणा ने बताया कि करीब आधे घंटे तक तेज ओलावृष्टि होती रही, जिससे मटर और गेहूं के साथ-साथ फलदार फसलों को भी नुकसान हुआ है. उनका कहना है कि इस समय पेड़ों पर फूल आने का दौर होता है और ओलों के कारण काफी फूल गिर गए हैं.

इसी तरह किसान जयेंद्र सिंह राणा ने बताया कि बड़कोट क्षेत्र के धारी-कलोगी इलाके में भी ओले गिरे, जिससे खेतों में खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर नुकसान का आकलन करने और उचित मुआवजा देने की मांग की है.

उधर, मौसम के इस बदलाव के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड बढ़ गई है. गंगोत्री और हर्षिल घाटी में हल्की बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समय फसलें बेहद संवेदनशील अवस्था में होती हैं, ऐसे में ओलावृष्टि ने किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ा दी है. अब किसानों की नजर प्रशासन पर टिकी है कि नुकसान का आकलन कर जल्द राहत प्रदान की जाए.

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