
- ग्राउंड रिपोर्ट | मोरी (उत्तरकाशी) से नीरज उत्तराखंडी
उत्तरकाशी जिले की मोरी तहसील के दूरस्थ गांव फिताड़ी में सोमवार देर रात एक भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। रात करीब 11 बजे ग्राम प्रधान द्वारा आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और फायर सर्विस मोरी व पुरोला, एसडीआरएफ, पुलिस, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें तुरंत मौके के लिए रवाना हुईं।
फिताड़ी गांव, मोरी बाजार से करीब 35 किलोमीटर दूर दुर्गम क्षेत्र में स्थित है, जहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शुरुआती राहत और बचाव का जिम्मा स्थानीय ग्रामीणों ने ही संभाला। ग्रामीणों की तत्परता और एकजुट प्रयासों से आग पर काबू पाया जा सका, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
हालांकि, आग की लपटों ने कई परिवारों की वर्षों की मेहनत को राख में बदल दिया। राजस्व उप निरीक्षक के अनुसार, आग लगने का प्राथमिक कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।
अग्निकांड में भारी नुकसान
- 4 बहुमंजिला आवासीय भवन पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए
- इन घरों में रह रहे 8 परिवार सीधे प्रभावित हुए
- 4 अन्य भवन भी आग की चपेट में आकर तबाह हो गए
- 6 अन्न भंडार (कोठार) जलकर राख हो गए
- 3 गायों की जलकर मौत हो गई
जनहानि टली, राहत की सांस
इस भयावह घटना के बावजूद किसी भी व्यक्ति के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है, जो राहत की सबसे बड़ी खबर है।
प्रभावित परिवारों की पीड़ा
अग्निकांड से प्रभावित परिवारों में प्रेम सिंह, कुंदन सिंह, रविन्द्र सिंह, उमशल सिंह, तिलक सिंह, नोनियाल सिंह, ताजम देई, दुदकली देवी, वीरेंद्र सिंह, मोहन सिंह और जनक सिंह सहित अन्य शामिल हैं। इन परिवारों के सामने अब सिर छुपाने और रोजमर्रा के जीवन को फिर से पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
राहत एवं बचाव कार्य जारी
घटना के बाद एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। जिलाधिकारी उत्तरकाशी और उपजिलाधिकारी पुरोला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दे रहे हैं।
जमीनी हकीकत
फिताड़ी जैसे दूरस्थ पहाड़ी गांवों में अग्निकांड जैसी घटनाएं सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे जीवन को प्रभावित करने वाली त्रासदी बन जाती हैं। यहां संसाधनों की कमी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां राहत कार्यों को और कठिन बना देती हैं। ऐसे में स्थानीय समुदाय की भूमिका ही सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आती है।
