
- आशिता डोभाल, उत्तरकाशी
माघ मेला (बाड़ाहाट कु थौलू) के पांचवें दिन रामलीला मैदान में आयोजित रवांल्टी-गढ़वाली-हिंदी कवि सम्मेलन ने साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया. लोकभाषाओं की मिठास, सामाजिक सरोकारों की धार और हास्य-व्यंग्य की चुटीली प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया. कार्यक्रम का संयोजन प्रभव साहित्य संगीत कला मंच, उत्तरकाशी एवं लेखक-शिक्षक राघवेंद्र उनियाल के तत्वावधान में संपन्न हुआ.
सम्मेलन में मंचासीन प्रसिद्ध साहित्यकार महावीर रवांल्टा की ओजस्वी कविता ने युवाओं में जोश भर दिया. उन्होंने आज-कल सस्ती लोकप्रियता के लिए डिग्रियां खरीदने की प्रवृत्ति पर तीखा कटाक्ष कर समाज को आईना दिखाया. अनोज बनाली ने सामाजिक जागरूकता से जुड़ा व्यंग्य प्रस्तुत करते हुए शराब-नशे पर करारा प्रहार किया. वहीं प्रदीप रावत की हास्य कविता “मोबाइल” ने श्रोताओं को ठहाकों में डुबो दिया.
दिनेश रावत ने समाज में एकता और संस्कृति संरक्षण का आह्वान किया. वीरेंद्र डंगवाल ‘पार्थ’ ने प्रेम पर आधारित कविता सुनाई, जबकि जौनसार-बावर क्षेत्र के नंदलाल भारती ने नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का संदेश दिया. नीरज नैथानी ने गंगा नदी पर बने बांधों पर तीखी कविता के माध्यम से सवाल खड़े किए.

डॉ. मीना नेगी ने पहाड़ की नारी के विविध रूपों को सशक्त काव्य में उकेरा. कल्पना असवाल की प्रेम-रस से सराबोर कविता, मोनिका भंडारी द्वारा पहाड़ की सुंदरता का सजीव चित्रण और राजेश जोशी की ग़ज़ल ने कार्यक्रम को विविध रंग दिए.
मंच पर राखी सिलवाल, आनंदी नौटियाल, गंगा बहुगुणा, ध्यान सिंह रावत, प्रमिला बिजलवान, माधव शास्त्री सहित अनेक रचनाकार उपस्थित रहे. कवियों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं की भरपूर तालियां गूंजीं. सभी कवियों को जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान द्वारा सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का कुशल और प्रभावी संचालन डॉ. साधना जोशी ने किया.
कुल मिलाकर, माघ मेले के इस साहित्यिक आयोजन ने लोकभाषाओं, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक चेतना के संगम से उत्तरकाशी की सांस्कृतिक गरिमा को और ऊंचा किया.
