ड्रैगन फ्रूट, कीवी और अति सघन सेब बागवानी से उत्तराखंड बनेगा ‘फल पट्टी’, 10 क्लस्टर विकास पर जोर

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में बैठक; मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना, एप्पल मिशन और सुफल योजना के तहत तकनीक-आधारित फलोत्पादन मॉडल से किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

देहरादून. मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में राज्य में फल उत्पादन को बढ़ावा देने तथा पर्वतीय क्षेत्रों में फलोत्पादन को आजीविका का सशक्त माध्यम बनाने के उद्देश्य से गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक सचिवालय सभागार में आयोजित की गई.

बैठक में उत्तराखंड को “फल पट्टी” के रूप में विकसित करने की दिशा में ड्रैगन फ्रूट उत्पादन, मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना के अंतर्गत कीवी संवर्धन, सेब की अति सघन बागवानी योजना तथा सेब तुड़ाई उपरांत प्रबंधन (सुफल) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई.

मुख्य सचिव ने कहा कि उच्च हिमालयी एवं मध्य पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु, मिट्टी और भौगोलिक परिस्थितियां फलोत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं. इन प्राकृतिक विशेषताओं के अनुरूप फल प्रजातियों और उच्च उत्पादकता वाली किस्मों का चयन कर क्लस्टर आधारित तथा तकनीक-सक्षम मॉडल अपनाया जाना आवश्यक है.

मुख्य सचिव के निर्देश
  • न्यूनतम 10 क्लस्टरों का चरणबद्ध विकास किया जाए.
  • ड्रैगन फ्रूट, कीवी और सेब उत्पादन में कम से कम 30 प्रगतिशील किसानों को तैयार किया जाए.
  • उच्च उत्पादकता वाली किस्मों का चयन कर वैज्ञानिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाए.
  • योजनाओं में औपचारिकता के बजाय धरातल पर स्पष्ट परिणाम सुनिश्चित किए जाएं.
  • किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, फील्ड डेमो और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाए.
  • क्लस्टर विकास की समस्त गतिविधियों का फोटो/वीडियो दस्तावेजीकरण कर ‘जायका पोर्टल’ पर अपलोड किया जाए.

बैठक में उद्यान विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए न्यूज़ीलैंड से आई पांच विशेषज्ञों की टीम विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर तकनीकी सुझाव और सहायता प्रदान कर रही है. वहीं, एप्पल मिशन और अति सघन बागवानी योजना के तहत उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उन्नत किस्मों, पौध गुणवत्ता सुधार और बाजार-उन्मुख उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

dragon_fruit and kiwi

सुफल योजना पर जोर

सेब की तुड़ाई उपरांत प्रबंधन (सुफल) योजना के अंतर्गत भंडारण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ कर मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया.

विश्वविद्यालयों की भूमिका

मुख्य सचिव ने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय तथा वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार को ऊंचाई और जलवायु के अनुसार उपयुक्त फल प्रजातियों का सर्वेक्षण, उच्च उत्पादकता वाली किस्मों के विकास तथा किसानों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए.

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि के साथ-साथ राज्य की आर्थिकी को सुदृढ़ करना है. क्लस्टर आधारित, तकनीक समर्थित और परिणामोन्मुखी कार्ययोजना के माध्यम से उत्तराखंड को फल उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया जाएगा.

बैठक में प्रमुख सचिव एल.एल. फैनई, सचिव उद्यान एवं प्रसंस्करण एस.एन. पांडेय, अपर सचिव हिमांशु खुराना, भरसार विश्वविद्यालय के कुलपति परविंदर कौशल सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे.

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