
औली में सजेगा ‘स्कीइंग विंटर कार्निवल 2026’, बनेगा उत्तराखंड का शीतकालीन पहचान पत्र
- हिमांतर ब्यूरो, चमोली
देवभूमि उत्तराखंड अब केवल चारधाम और ट्रैकिंग तक सीमित नहीं, बल्कि शीतकालीन पर्यटन और विंटर स्पोर्ट्स के वैश्विक नक्शे पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है. इसी कड़ी में 13 से 16 फरवरी 2026 तक चमोली जिले के विश्वविख्यात स्की स्थल औली में ‘औली स्कीइंग विंटर कार्निवल एवं राष्ट्रीय शीतकालीन खेल प्रतियोगिता/चैंपियनशिप 2026’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है.
यह कार्निवल सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि खेल, संस्कृति, साहसिक पर्यटन और स्थानीय आजीविका का ऐसा संगम होगा, जो औली को भारत के स्थायी विंटर स्पोर्ट्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं, अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव
चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में अल्पाइन स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और स्की माउंटेनियरिंग (स्किमो) जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. देशभर से आने वाले खिलाड़ी औली की प्राकृतिक ढलानों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे.
उद्घाटन दिवस पर जहां पंजीकरण, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्थानीय स्की प्रदर्शन होंगे, वहीं आईटीबीपी द्वारा स्की एवं रेस्क्यू डेमो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेगा. इसके बाद अगले दो दिन रोमांचक प्रतिस्पर्धाओं के नाम रहेंगे और 16 फरवरी को पुरस्कार वितरण के साथ आयोजन का समापन होगा.

प्रशासनिक समन्वय से सशक्त आयोजन
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इस आयोजन की विस्तृत रणनीति तय की गई. बैठक की अध्यक्षता मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गर्बयाल ने की.
आयोजन की मुख्य जिम्मेदारी गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) संभालेगा, जबकि आईटीबीपी तकनीकी सहयोग, प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराएगी.
सुरक्षा मानकों, खिलाड़ियों की सुविधाओं, आयोजन स्थल प्रबंधन और विभागीय समन्वय पर विशेष फोकस किया गया है, जिससे यह आयोजन पूरी तरह सुरक्षित और पेशेवर ढंग से संपन्न हो सके.
“औली स्कीइंग विंटर कार्निवल एवं राष्ट्रीय शीतकालीन खेल प्रतियोगिताएं उत्तराखंड की शीतकालीन पर्यटन क्षमता, साहसिक खेलों की परंपरा और स्थानीय समुदायों की आजीविका को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं.” –धीराज सिंह गर्बयाल, सचिव पर्यटन / सीईओ, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद
खेलों के साथ संस्कृति की भी बर्फीली चमक
इस विंटर कार्निवल की खास बात यह होगी कि यहां सिर्फ बर्फ पर खेल ही नहीं, बल्कि गढ़वाली और कुमाऊंनी लोकसंस्कृति, पारंपरिक नृत्य, संगीत और स्थानीय कला भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी.
पर्यटकों के लिए यह अनुभव खेल और संस्कृति—दोनों को एक साथ महसूस करने का अवसर होगा.
स्थानीय युवाओं और अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल
आयोजन से स्थानीय युवाओं को रोजगार, होमस्टे पर्यटन को बढ़ावा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है. पर्यटन विभाग का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से औली जैसे स्थलों पर सालभर पर्यटन गतिविधियां संचालित हो सकेंगी.
औली: जहां बर्फ रोमांच से मिलती है
समुद्र तल से 2500 से 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित औली अपने 3 से 5 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक स्की ढलानों, ओक-देवदार के जंगलों और नंदा देवी, कामेत, माना जैसे हिमालयी शिखरों के विहंगम दृश्यों के लिए जाना जाता है.
जोशीमठ से औली तक एशिया की दूसरी सबसे लंबी रोपवे (गोंडोला) पर्यटकों के लिए अपने आप में एक रोमांचक यात्रा है.
