
- नीरज उत्तराखंडी, नौगांव, उत्तरकाशी
उत्तरकाशी जनपद के विकासखंड नौगांव के अंतर्गत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय बिंगसी में शिक्षा व्यवस्था भय और असुरक्षा के साए में संचालित हो रही है. करीब पांच दशक पहले बने इस विद्यालय भवन को वर्ष 2023 में ही तकनीकी संस्था लोनिवि बड़कोट द्वारा निष्प्रयोज्य (अनफिट) घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद यहां नन्हे बच्चों को उसी जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर किया जा रहा है.
विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक है. छत से टपकते पानी से बचाव के लिए ऊपर काली तिरपाल बिछाई गई है. टिन की चादरों को सहारा देने के लिए लगाए गए तख्ते और लकड़ी की बल्लियां भी सड़ चुकी हैं. भवन की एक दीवार में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और वह तिरछी हो गई है, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है.
कमरों में फैली नमी (सीलन) के कारण बच्चों के बीमार पड़ने का खतरा भी लगातार बना हुआ है. हालात इतने बदतर हैं कि शिक्षक स्वयं भय के माहौल में छात्रों को कभी बरामदे में तो कभी कमरों के किनारे बैठाकर पढ़ाने को मजबूर हैं.
निष्प्रयोज्य घोषित, फिर भी जारी कक्षाएं
मार्च 2023 में लोनिवि बड़कोट द्वारा भवन को उपयोग के लिए अयोग्य घोषित किए जाने के बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है. यह स्थिति विभाग की कार्यशैली और बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही को उजागर करती है.
जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज
जिला पंचायत सदस्य विजय मंधानी ने बताया कि जिला पंचायत की शिक्षा समिति की बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है और मुख्य शिक्षाधिकारी को अवगत कराया गया है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी.
वहीं ग्राम प्रधान जगमोहन सिंह चौहान ने विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जब भवन को निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है, तो वहां कक्षाएं संचालित करना बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ है.
विभाग का जवाब
खंड शिक्षाधिकारी नौगांव सौरभ पांडे ने कहा, “यदि भवन निष्प्रयोज्य है तो वहां कक्षाएं संचालित नहीं होनी चाहिए. भवन के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. कार्यालय पहुंचने पर ही विस्तृत जानकारी दे पाऊंगा.”
बड़ा सवाल: हादसे का इंतजार क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन को पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका है, तो आखिर प्रशासन और शिक्षा विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहे हैं? बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभागों की यह सुस्ती गहरी चिंता का विषय बनी हुई है.
