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स्वतंत्रता दिवस: पारम्परिक वेशभूषा में दिखे प्रवासी उत्तराखंडी

स्वतंत्रता दिवस: पारम्परिक वेशभूषा में दिखे प्रवासी उत्तराखंडी

दिल्ली-एनसीआर
नई दिल्ली. 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित लाल किले में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड प्रवासियों के दल ने पारम्परिक वेशभूषा में प्रतिभाग किया. कार्यक्रम में उत्तराखण्ड की संस्कृति एवं वेशभूषा का प्रदर्शन दल द्वारा किया गया है.  इस वर्ष लाल किले में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में सभी राज्यों के प्रवासी निवासियों के दलों को आमंत्रित किया गया. सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग, उत्तराखण्ड द्वारा दिल्ली में निवास कर रहें उत्तराखण्डवासियों को लाल किला में आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया. जिसमें 45 प्रवासी उत्तराखण्डवासियों के दल द्वारा स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया. दल में शामिल सदस्यों ने कहा कि लाल किले में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड राज्य की ओर से प्रतिनिधित्व कर गौरवान्वित एवं प्रफुल्लित महसूस कर रहे है. दल के सदस्यों में श्री कमल किशोर,...
स्वतंत्र भारत में स्वराज की प्रतिष्ठा

स्वतंत्र भारत में स्वराज की प्रतिष्ठा

साहित्‍य-संस्कृति
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2022) पर विशेष  प्रो. गिरीश्वर मिश्र  आज़ादी मिलने के पचहत्तर साल बाद देश स्वतंत्रता का ‘अमृत महोत्सव’ मना रहा है तो यह विचार करने की इच्छा और स्वाभाविक उत्सुकता पैदा होती है कि स्वतंत्र भारत का जो स्वप्न देखा गया था वह किस रूप में यथार्थ के धरातल पर उतरा. स्वाधीनता संग्राम का प्रयोजन यह था कि भारत को न केवल उसका अपना खोया हुआ स्वरूप वापस मिले बल्कि वह विश्व में अपनी मानवीय because भूमिका को भी समुचित ढंग से निभा सके. देश या राष्ट्र का भौगोलिक अस्तित्व तो होता है पर वह निरा भौतिक पदार्थ नहीं होता जिसमें कोई परिवर्तन न होता हो. वह एक गत्यात्मक रचना है और उसी दृष्टि से विचार किया जाना उचित होगा. बंकिम बाबू ने भारत माता की वन्दना करते हुए उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में ‘सुजलां सुफलां मलयज शीतलां शस्य श्यामलां मातरं वन्दे मातरं‘ का अमर गान रचा था. ‘सुखदां वरदां म...
‘वन्दे मातरम्’: जन-गण-मन के आंदोलन का राष्ट्रगीत  

‘वन्दे मातरम्’: जन-गण-मन के आंदोलन का राष्ट्रगीत  

समसामयिक
डॉ. मोहन चंद तिवारी देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की 74वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है. हर देश का स्वतंत्रता प्राप्ति के आंदोलन से जुड़ा एक संघर्षपूर्ण इतिहास होता है. भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी एक क्रांतिकारी और देशभक्ति पूर्ण इतिहास है, जिसकी जानकारी प्रत्येक भारतवासी को होनी चाहिए. हमें अपने संविधान सम्मत राष्ट्रगान, 'जन गण मन' राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्’ और तिरंगे झंडे के इतिहास के बारे में भी यह तथ्यात्मक जानकारी होनी चाहिए कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इन राष्ट्रीय प्रतीकों की कितनी अहम भूमिका रही थी? यह इसलिए भी आवश्यक होना चाहिए जैसे हम हर वर्ष 15 अगस्त को लालकिले पर राष्ट्र ध्वज तिरंगा फहराना राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में मनाते हैं, उसी तरह स्वन्त्रता आंदोलन को प्रेरित करने वाले राष्ट्रगान 'जन गण मन', राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्’ तथा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बारे में जानक...