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किस्से-कहानियां

आब कब आलै ईजा…

डॉ. रेखा उप्रेती  ‘‘भलि है रै छै आमाऽ…’’ गोठ के किवाड़ की चौखट पर आकर खड़ी आमा के पैरों में झुकते हुए हेम ने कहा. ‘‘को छै तु?’’ आँखें मिचमिचाते हुए पहचानने की कोशिश की आमा ने… ‘‘आमा मी’’ हेम… ‘‘को मी’’… ‘‘अरे मैं हेम… तुम्हारा नाती..’’ आमा कुछ कहती तभी बाहर घिरे