September 24, 2020
Home Posts tagged मकोट
संस्मरण

चौमासेक गाड़ जैसी…

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—29 प्रकाश उप्रेती आज बात- ‘सडुक’ (सड़क) और ‘गाड़’ (नदी) की. हमारा गाँव न सड़क और न ही नदी के किनारे है. सड़क और नदी से मिलने के मौके तब ही मिलते थे जब हम दुकान, ‘ताहे होअ बहाने'(नदी के करीब के खेतों में हल चलाने) और ‘मकोट (नानी