Tag: भारतीय जनता पार्टी

जनादेश का आशय : जनता क्या चाहे?

जनादेश का आशय : जनता क्या चाहे?

समसामयिक
प्रो. गिरीश्वर मिश्र  इसमें कोई संदेह नहीं कि गोवा के सागर तट , उत्तराखंड के पहाड़ , उत्तर प्रदेश कि गंगा-जमुनी मैदान और पूर्वोत्तर भारत में पर्वत-घाटी वाले मणिपुर से आने वाले चुनाव परिणामों से भारतीय जनता पार्टी की छवि राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त और ऊर्जावान राजनैतिक दल के रूप में निखरी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक नायक के रूप स्वीकृति पर फिर मुहर लगी है. इस तरह के स्पष्ट राष्ट्रव्यापी जन-समर्थन को मात्र संयोग कह कर कमतर नहीं आंका जा सकता  और  न इसे जाति, धन because और धर्म के आधार पर ही समझा जा सकता है. इसे दिशाहीन विपक्ष की मुफ़्त की सौग़ात भी कहना उचित न होगा क्योंकि जहां पंजाब के परिणाम वहाँ की सरकार के विरुद्ध गए हैं और विपक्ष को पूरा अवसर मिला था उसके ठीक विपरीत भाजपाशासित प्रदेशों में मिले मुखर जनादेश शासन में आम जन का भरोसा और विश्वास को प्रकट करते हैं. साथ साथ ही वे ...
किसी को तो पड़ी हुई लकड़ी लेनी पड़ेगी साहब! पुलिस सेवा के लिए है या अपशब्दों के लिए?

किसी को तो पड़ी हुई लकड़ी लेनी पड़ेगी साहब! पुलिस सेवा के लिए है या अपशब्दों के लिए?

देश—विदेश
हिमांतर ब्यूरो, नई दिल्ली मैं बचपन से ही पुलिस वालों से चार क़दम दूर भागता हूं. कारण उनका रवैया रहा है. बहुत कम पुलिसकर्मी होंगे जो आपसे सलीक़े से बात करेंगे. नहीं तो रौब दिखाना उनकी प्रवृत्ति में शामिल because होता है. शायद ये एक तरीक़ा हो अपराधी को तोड़ने और अपराध का पता लगाने के लिए. लेकिन, जब ये ही रवैया पुलिस आम नागरिकों पर अपनाने लगती है, तो उसकी छवि धूमिल हो उठती है. उसके प्रति आम नागरिक के मन में डर पैदा हो जाता है. बढ़ेगी आम नागरिक पुलिस से कतराने because लगते हैं जिसका ख़ामियाजा समाज को उठाना पड़ता है, क्योंकि बहुत-सी घटनाओं में नागरिक 'पुलिस के चक्कर में कौन पड़े कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं.' मैंने ऊपर जो लिखा है इसका मतलब ये कतई नहीं है कि सारे पुलिसकर्मी एक से होते हैं...लेकिन कुछ पुलिसकर्मियों की बदौलत उनको यह तमगा पहनना पड़ता है. बढ़ेगी जब पुलिसकर्मी ने कहा- तुम क्...
अजय भट्ट ने सीएम को लिखा खत, कोरोना से मरने वाले पत्रकारों को दी जाए सरकारी मदद

अजय भट्ट ने सीएम को लिखा खत, कोरोना से मरने वाले पत्रकारों को दी जाए सरकारी मदद

नैनीताल
अरविंद मालगुड़ी, नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के सांसद अजय भट्ट ने कोरोना वायरस से मरने वाले पत्रकारों के लिए सरकारी सहायता की मांग की है. उन्होंने इसे लेकर सूबे के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को खत लिखा है. भट्ट ने अपने खत में लिखा है कि कोरोना वायरस से मरने वाले पत्रकारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक मदद की जाए. so उन्होंने लिखा कि सरकार को ऐसा नियम पारित करना चाहिए जिससे कोरोना काल में अकाल मृत्यु के गाल में समाने वाले पत्रकारों को मुख्यमंत्री राहत कोष एवं पत्रकार कल्याण कोष परिषद के अलावा कोविड-19 अधिनियम के अंतर्गत because मदद दी जाए. उन्होंने आगे लिखा कि अगर सरकार ऐसा करती है, तो यह सराहनीय प्रयास होगा. भट्ट ने कहा कि ऐसा करने पर प्रभावित परिवारों को मदद मिलने के साथ-साथ पत्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन और अधिक तत्परता एवं निडरता से कर सकते हैं.  because  मुख्यमंत्री त...