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संस्मरण

इंतज़ार… पहाड़ी इस्टाइल

‘बाटुइ’ लगाता है पहाड़, भाग—8 रेखा उप्रेती हुआ यूँ कि मेरी दीदी की शादी दिल्ली के दूल्हे से हो गयी. सखियों ने “…आया री बड़ी दूरों से बन्ना बुलाया” गाकर बारात का स्वागत किया और नैनों की गागर छलकाती दीदी दिल्ली को विदा कर दी गयी. आसपास के गाँवों या शहरों में ब्याही गयी लडकियाँ […]