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समसामयिक

हिंदी पत्रकारिता का काल, कंकाल और महाकाल

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष प्रकाश उप्रेती हिन्दी पत्रकारिता का सफर कई उतार-चढाव से होकर गुजरा है. उसका कोई स्वर्ण काल जैसा नहीं रहा है और होना भी नहीं चाहिए लेकिन पत्रकारिता का भक्तिकाल शाश्वत सत्य है. वह लगभग इन 200 वर्षों की यात्रा में नजर आता है.मासिक, साप्ताहिक और दैनिक से लेकर