January 18, 2021
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संस्मरण

ओ हरिये ईजा..कुड़ी मथपन आग ए गो रे

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—38 प्रकाश उप्रेती ‘ओ…हरिये ईजा ..ओ.. हरिये ईज… त्यूमर कुड़ी मथपन आग ए गो रे’ (हरीश की माँ… तुम्हारे घर के ऊपर तक आग पहुँच गई है). आज बात उसी- “जंगलों में लगने वाली आग” की. मई-जून का महीना था. पत्ते सूख के झड़ चुके थे.