September 20, 2020
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साहित्यिक हलचल

संसारभर का दुख बाँटती महादेवी  

मीना पाण्डेय महादेवी mahadevi vermaनिशा को, धो देता राकेश चाँदनी में जब अलकें खोल, कली से कहता था मधुमास बता दो मधुमदिरा का मोल; गए तब से कितने युग बीत हुए कितने दीपक निर्वाण! नहीं पर मैंने पाया सीख तुम्हारा सा मनमोहन गान. महादेवी महादेवी जितनी छायावाद की एक महान कवयित्री के रूप में महत्वपूर्ण
पर्यावरण

प्रदूषित गंगा और हम!

कमलेश चंद्र जोशी कहते हैं प्रकृति हर चीज का संतुलन बनाकर रखती है. लेकिन अधिकतर देखने में यह आया है कि जहां-जहां मनुष्य ने अपना हाथ डाला वहां-वहां असंतुलन या फिर समस्याएं पैदा हुई हैं. इन समस्याओं का सीधा संबंध मनुष्य की आस्था, श्रद्धा, स्वार्थ या तथाकथित प्रेम से रहा है. गंगा को हमने मॉं […]