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कला-रंगमंच

रंगमंच के विकास व समृद्धि में सत्येन्द्र शरत का अविस्मरणीय योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता 

– स्मरण – महावीर रवांल्टा  27 मार्च 1987 को राजकीय पोलीटेक्निक उतरकाशी के वार्षिकोत्सव में मेरे निर्देशन में डा भगवतीचरण वर्मा द्वारा लिखित ‘दो कलाकार’ तथा सत्येन्द्र शरत द्वारा लिखित because ‘समानान्तर रेखाएं’ नाटक मंचित हुए थे. निर्देशन के साथ ही इनमें
स्मृति-शेष

साहित्य के निकष ‘अज्ञेय’

अज्ञेय के जन्म दिवस पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र रवि बाबू ने 1905 में एकला चलो की गुहार लगाई थी कि मन में विश्वास हो तो कोई साथ आए न आए चल पड़ो चाहे , खुद को ही समिधा क्यों न बनाना पड़े – जोदि तोर दक केउ शुने ना एसे तबे एकला चलो रे । […]