साहित्‍य-संस्कृति

गीता से प्रेरित था ‘भारतराष्ट्र’ के स्वतन्त्रता आंदोलन का इतिहास

गीता जयंती ( 14 दिसंबर) पर विशेष

  • डॉ. मोहन चंद तिवारी

 प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है. इस बार गीता जयंती 14 दिसंबर को मनाई जा रही है. मान्यता है कि इसी दिन because मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को गीता ग्रंथ का प्रादुर्भाव हुआ था. कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध के दौरान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश से गीता का कालजयी चिंतन अस्तित्व में आया.

ज्योतिष

सनातन हिन्दू धर्म के नवनीत स्वरूप इस गीताग्रंथ के अठारह अध्यायों में जो संचित ज्ञान है, वह मनुष्यमात्र के लिए आज भी बहुत उपयोगी है. गीताज्ञान के माध्यम से भगवान कृष्ण ने जहां एक ओर अर्जुन को गीता का ज्ञान देकर क्षत्रियोचित कर्म हेतु प्रेरित किया तो because दूसरी ओर एक युगप्रवर्तक के रूप में धर्म के नाम पर पुरातन काल से चली आ रही अंधरूढ़ियों का निराकरण करते हुए धर्म संस्था के सहज,सरल और लोकोपयोगी स्वरूप की स्थापना की. द्वापर युग में कंस के अत्याचार और आतंक से मुक्ति दिलाने तथा धर्म की पुनर्स्थापना के लिए ही विष्णु के आठवें अवतार के रूप में भगवान् कृष्ण ने जन्म लिया था. गीता में भगवान् कृष्ण का कथन है कि “जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की वृद्धि होती है तो मैं धर्म की स्थापना के लिए हर युग में अवतार लेता हूं-

ज्योतिष

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत.
अभ्युत्थानमधर्मस्य because तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
परित्राणाय साधूनां because विनाशाय च दुष्कृताम्.
धर्मसंस्थापनार्थाय because संभवामि युगे युगे ॥”
गीता‚4.7-8

ज्योतिष

ऐतिहासिक धरातल पर श्रीमद्भगवद्गीता के आविर्भाव की पृष्ठभूमि महाभारत का धर्मयुद्ध है. किंतु वैचारिक दृष्टि से यह युद्ध अविवेक और विवेक,अन्याय और न्याय के बीच लड़ा गया because युद्ध भी है.जब मनुष्य की बुद्धि जड हो जाती है,सत्ता का मद और शक्ति का दम्भ उसे अंधा बना देता है तब वह धृतराष्ट्र के मदांध पुत्रों की तरह अविवेकजन्य विनाश की ओर अग्रसर होने लगता है. दूसरी ओर विषादग्रस्त मनुष्यों के लिए भी गीता रामबाण ओषधि है.

ज्योतिष

अर्जुन जो महाभारत का महानायक होने के साथ साथ शौर्य और पराक्रम का अद्वितीय प्रतिमान भी है किंतु मोह और अज्ञान के वशीभूत होकर अपने सामने आने वाली समस्याओं से भयभीत है. because पराक्रमशाली क्षत्रिय होने के बाद भी युद्ध लड़ने के स्वधर्म से विचलित होकर उसने अपने हथियार डाल दिए हैं. गीता उसी विषादग्रस्त अर्जुन को भगवान् कृष्ण द्वारा दिया गया विवेकपूर्ण ज्ञान है.

ज्योतिष

दरअसल, भारत के सन्दर्भ में गीता महज एक धार्मिक ग्रन्थ ही नहीं बल्कि स्वतंत्रता आन्दोलन का पुरातन राष्ट्रीय गीत भी है. स्वन्त्रता संग्राम के संघर्ष के दौरान लोकमान्य  बालगंगाधर तिलक रचित ‘गीता-रहस्य’ नामक ग्रन्थ  आधुनिक भारतीय राष्ट्रवाद की चेतना से because अनुप्राणित रचना है. तिलक की स्वराज्य की अवधारणा गीता के दर्शन से ही प्रभावित रही थी. तिलक ने इस ग्रंथ के माध्यम से बताया कि गीता चिन्तन उन लोगों के लिए नहीं है जो स्वार्थपूर्ण सांसारिक जीवन बिताने के बाद अवकाश के समय खाली बैठ कर पुस्तक पढ़ने लगते हैं और यह संसारी लोगों के लिए  प्रारंभिक शिक्षा है. इसमें यह दार्शनिकता निहित है कि हमें मुक्ति की ओर दृष्टि रखते हुए सांसारिक कर्तव्य कैसे करने चाहिए. देश के सामने जब संकट हो तब इस ग्रंथ में मनुष्य को उसके संसार में वास्तविक कर्तव्यों का बोध कराया गया है.

ज्योतिष

गीता के निष्काम कर्मयोग because और अनासक्ति भाव से प्रेरित होकर ही महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्याग्रह के शस्त्र से भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम का युद्ध लड़ा.

ज्योतिष

गीता का राष्ट्र के नाम सन्देश

आजादी के इतिहास की कुछ पिछली because कड़ियों को आज पुनः ताजा किया जाए तो 1930 में प्रकाशित ‘हिन्दू पंच’ नाम की पत्रिका के बलिदान अंक के सम्पादकीय का यह कथन उल्लेखनीय है जिसे ब्रिटिश सरकार ने तब जब्त कर लिया था. इसमें आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों को संबोधित करते हुए लिखा गया था-

ज्योतिष

”जब किसी देश की या जाति की because घोर दुरवस्था हो जाती है,जब दानवों के कुटिल प्रहारों से सत्य और न्याय की ध्वनि बन्द हो जाती है और धर्म तथा मानवता का सर्वत्र तिरस्कार होता है तब सज्जन तथा संयमी पुरुष का एक मात्र कर्तव्य हो जाता है कि वह सत्कर्म के लिए बलिदान करे. यही गीता का कथन है. यही गीता का सन्देश है.”

ज्योतिष

पिछली शताब्दी में स्वन्त्रता संग्राम के संघर्ष के दौरान तिलक की स्वराज्य की अवधारणा गीता के दर्शन से ही प्रभावित रही थी. गीता के निष्काम कर्मयोग और अनासक्ति भाव से प्रेरित होकर ही महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्याग्रह के शस्त्र से भारतीय because स्वतन्त्रता संग्राम का युद्ध लड़ा.मन्मथनाथ गुप्त ने ‘भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का इतिहास’ नामक पुस्तक में लिखा है कि आंग्ल शिक्षा पद्धति से पूर्व का भारत जो अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्षशील था उसके अवचेतन में कहीं न कहीं आंतरिक रूप से काम कर रही कर्म सिध्दान्त, निस्वार्थ कर्म, लोकसंग्रह, स्थितप्रज्ञता, ज्ञान की परम पावनता, युद्ध में प्राणों की बाजी लगाकर देशरक्षा की निष्ठा, विश्वरूपता और ईश्वर शरणागति- जैसी गीता द्वारा उपदिष्ट अवधारणाओं की महती भूमिका रही थी.

गीता दर्शन के माध्यम से भारतीय लोक जीवन की इन्हीं देशभक्ति एवं राष्ट्र कल्याण से जुडी मानसिक अवधारणाओं ने भारत के क्रान्तिकारियों को आत्मबलिदान के लिए भी प्रेरित किया था.

ज्योतिष

क्रान्तिकारियों और स्वतन्त्रता सेनानियों पर गीता का खास प्रभाव यह पड़ा कि जब भी प्रश्न फाँसी या माफी मागने का रहा तो गीता ने उस द्वन्द्व को बहुत स्पष्ट कर दिया.गीता ने उन्हें ऐसी because महासाहसवृत्ति प्रदान की कि क्रान्तिकारी को मृत्यु चुनने या वरण करने में तनिक भी सोचना नहीं पड़ा. इसलिए बहुत से क्रान्तिकारियों ने स्वयं मृत्यु का वरण किया चाहे वह झाँसी की रानी थी या चन्द्रशेखर आज़ाद, शहीद भगतसिंह या खुदीराम बोस उन सभी ने स्वयं अपने प्राणों की आहुति देकर लोगों को निष्काम कर्ममार्ग की ओर प्रेरित किया.

ज्योतिष

भारतीय सेना में आज भी अनेक जवान हैं जो महाभारत से प्रेरणा लेकर रणभूमि में वीरतापूर्ण युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हैं तथा गीता के द्वारा दिए गए सन्देश “हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्” (गीता, 2.37) की भावना से देश और राष्ट्र की because रक्षा के लिए हंसते हंसते अपने प्राणों की आहुति भी दे देते हैं. कारगिल की रणभूमि में मेजर पद्यपाणि ने महाभारत तथा गीता से ही प्रेरणा लेकर वीरता से लड़ते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था.

महर्षि वेद व्यास ने भी युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले ऐसे ही शूरवीरों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा है कि तीनों लोकों में शूरवीरता से बढ़कर और कोई वस्तु नहीं. शूरवीर सबका पालनहार है और सारा संसार उसी के सहारे टिका है-

ज्योतिष

न हि शौर्यात् परं किञ्चित्
त्रिषु because लोकेषु विद्यते.
शूरः because सर्वं पालयति
सर्वं because शूरे प्रतिष्ठितम्..”
शान्तिपर्व.‚99.18

ज्योतिष

देशभक्ति,मातृभूमि प्रेम से ओतप्रोत because होकर अपने राष्ट्रीय दायित्व का स्वधर्म निभाने में गीता और महाभारत से जो हमें प्रेरणा मिल सकती है वह किसी अन्य ग्रन्थ से मिलनी कठिन ही है. गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी के अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं!

Share this:

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *