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बीरभूम हिंसा के बाद भी बवाल जारी, एक और TMC नेता की हत्या

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बवाल जारी है. बीरभूम हिंसा (Birbhum violence) के बाद से राजनीतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. पश्चिम बंगाल के बीरभूम में टीएमसी नेता की हत्या के बाद हुई हिंसा के दो दिन बाद नादिया में TMC नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इसके अलावा हुगली के तारकेश्वर में तृणमूल की महिला पार्षद को कार से कुचलने का भी प्रयास किया गया.TMCकी महिला पार्षद रूपा सरकार को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है. इससे पहले सोमवार को बीरभूम के रामपुरहाट में टीएमसी पंचायत नेता भादू शेख की हत्‍या कर दी गई थी. इसके बाद बीरभूम जिले के एक गांव में मंगलवार को कथित तौर पर कुछ मकानों में आग लगा दी गई, जिसमें आठ लोगों की जल कर मौत हो गई.

इस मामले में अभी तक 23 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इस घटना के बाद बागुटी गांव में दहशत का आलम यह कि पीड़ित परिवार अपने घरों को छोड़कर पलायन कर रहे हैं. वहीं इस अग्निकांड की राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने तीन दिनों के भीतर पश्चिम बंगाल पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है.

बीरभूम हिंसा पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार को दिए निर्देश

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक नेता की हत्या के बाद भड़की हिंसा में 8 लोगों को जिंदा जला दिया गया. इस घटना पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है और इस मामले में कोर्ट ने गुरुवार दोपहर 2 बजे से पहले केस डायरी और अब तक की जांच रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि, सच सभी के सामने जरूर आना चाहिए. साथ ही राज्य सरकार को भी निर्देश दिए गए हैं कि वो गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराए. इसके अलावा जहां इस हिंसा को अंजाम दिया गया, वहां किसी भी चीज से छेड़छाड़ नहीं करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि, इसके लिए उस जगह पर कैमरे लगाए जाएं.

क्या था पूरा मामला, क्‍यों भड़की बंगाल के बीरभूम में हिंसा

दरअसल पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय नेता की हत्‍या कर दी गई थी. इस हत्या के कुछ देर बाद ही रामपुरहाट के करीब बागुटी गांव में दर्जनभर झोपड़ियों को आग लगा दी गई. इसमें दो बच्चों और तीन महिलाओं समेत आठ लोगों की जलने से मौत हो गई. इस घटना के बाद भाजपा ने सीएम ममता को इस्तीफा देने और राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है. राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एडीजी (CID) ज्ञानवंत सिंह के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया है.

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