उत्तराखंड हलचल

ऋषिकेश नगर निगम ने 39 करोड़ की पेयजल योजना को जारी NOC ली वापस

ऋषिकेश। अर्धनगरीय पेयजल योजना के तहत उत्तराखंड जल संस्थान की ओर से 39 करोड़ की लागत नई पेयजल योजना पर काम किया जा रहा है। नगर निगम के 14 वार्डों में मानक विपरीत खुदाई और नागरिकों की परेशानी को देखते हुए जल संस्थान को जारी एनओसी नगर निगम प्रशासन ने वापस ले ली है। भविष्य में क्षतिग्रस्त सड़कों का निर्माण पेयजल संस्थान कराएगा। जब तक इस पर अनुबंध नहीं होता तब तक काम रोक दिया गया है।

नगर निगम में शामिल ग्रामीण क्षेत्र के करीब 14 वार्डों के लिए उत्तराखंड जल संस्थान की ओर से अर्धनगरीय पेयजल योजना पर काम शुरू किया गया था। 39 करोड़ की लागत से पूरी होने वाली इस योजना के तहत ठेकेदार ने जेसीबी मशीनें लगाकर इन वार्डों में सड़कों की खुदाई की। जेसीबी चलने से कई भवनों को क्षति पहुंची। ठेकेदार और कर्मचारियों के साथ विवाद की स्थिति पैदा हो गई।

हालात की समीक्षा के लिए गुरुवार को नगर निगम की महापौर अनीता ममगाईं ने नगर निगम सभागार में संबंधित क्षेत्र के पार्षद, जल संस्थान अधिकारियों और नगर निगम अधिकारियों की बैठक बुलाई। बैठक में उपस्थित पार्षद गुरविंदर सिंह, विजय बडोनी, जयेश राणा, वीरेंद्र रमोला, विपिन पंत, विजेंद्र मोगा, लक्ष्मी रावत ने उपस्थित जल संस्थान के अधिकारियों और ठेकेदार को खरी खोटी सुनाई। उपस्थित ठेकेदार पर आरोप लगाया कि ठेकेदार के लोग पार्षदों और नागरिकों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं। इतना ही नहीं नगर निगम के साथ अनुबंध के मुताबिक काम नहीं हो रहा है, बल्कि सड़कों की खुदाई स्वीकृत मानक के विरुद्ध की जा रही है।

पार्षदों की बात सुनने के बाद महापौर अनीता ममगाईं ने उपस्थित जल संस्थान अधिकारियों और ठेकेदार को खरी खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि यदि कार्यप्रणाली में सुधार नहीं लाया गया तो संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। उन्होंने कहा कि जल संस्थान की ओर से रोड कटिंग के बदले नगर निगम को एक करोड़ रुपया दिया गया है। जबकि 14 वार्डों की सड़कें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दी गई है। महापौर ने कहा कि जल संस्थान को यह धनराशि वापिस की जाएगी। पूर्व में जारी एनओसी को रद्द किया जाएगा। नए अनुबंध के मुताबिक अब जल संस्थान ही तोड़ी गई सड़कों का निर्माण कराएगा।

नगर आयुक्त जीसी गुणवंत ने कहा कि विभाग के साथ नया अनुबंध शीघ्र किया जाएगा। एनओसी तत्काल खारिज की जा रही है। एक करोड़ धनराशि भी जल संस्थान को वापिस होगी। उन्होंने कहा कि टूटी सड़कों का जल संस्थान जब निर्माण कराएगा तो नगर निगम की तकनीकी टीम मौके पर मौजूद रहेगी।

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