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राजस्थान में BSP से कांग्रेस में आए विधायकों ने किया दिल्ली कूच

राजस्थान की गहलोत सरकार पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों की सरकार के प्रति लगातार नाराजगी बढ़ती जा रही है जिसके बाद सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. अब विधानसभा चुनावों से पहले इन विधायकों के दिल्ली कूच ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की टेंशन बढ़ा दी है. मिली जानकारी के मुताबिक बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए 6 विधायकों में से राजेंद्र गुढ़ा, लाखन सिंह मीणा, और संदीप यादव ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है जहां उनकी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करने की संभावना बताई गई है. मालूम हो कि विधायक पहले भी कई बार कह चुके हैं कि उन्हें कांग्रेस आलाकमान से मिलवाने का किया गया वादा पूरा नहीं किया गया है. विधायकों का कहना है कि कांग्रेस में आने के 2 साल बाद भी उन सभी को पद नहीं मिला है वहीं दूसरा यह कि 2020 में सियासी संकट में गहलोत सरकार का साथ देने के बावजूद अब उन्हें अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर डर सता रहा है. विधायकों का कहनैा है कि कांग्रेस में अगले विधानसभा चुनाव का टिकट मिलेगा या नहीं यह कहना मुश्किल है.

बता दें कि कुछ दिनों पहले राज्यसभा चुनावों के दौरान इन विधायकों को सीएम गहलोत ने हर मांग पूरी करने का आश्वासन दिया था लेकिन उसके बावजूद विधायक नाराज ही चल रहे हैं. विधायकों का कहना है कि कैबिनेट में जल्द पुनर्गठन किया जाए. इधर सैनिक कल्याण मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने हाल में कहा था कि उन्हें कांग्रेस को आगे समर्थन देने के बारे में सोचना पड़ेगा.

कांग्रेस पर लगाया वादे पूरे नहीं करने का आरोप

विधायकों के गुट की अगुवाई कर रहे राज्यमंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने हाल में कहा था कि हमसे 2020 जो वादे किए गए थे उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा था कि हमारे सभी साथियों को सरकार में मंत्री या संसदीय सचिव बनाने का कहा गया था लेकिन केवल मुझे मंत्री और दो विधायकों को बोर्ड-निगम का अध्यक्ष बनाया गया है.

इसके आगे गुढा ने कहा था कि अगर वादे पूरे नहीं होते हैं तो हमें कांग्रेस को साथ देने के बारे में सोचना पड़ेगा. वहीं इससे पहले भरतपुर के नगर से विधायक वाजिब अली ने भी गहलोत सरकार के मंत्री पर हमला बोला था. अली ने कहा था कि शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला किसी की नहीं सुनते हैं और उनकी मांगों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है.

हर तरफ उठे नाराजगी के सुर !

बता दें कि 2018 के बाद से गहलोत सरकार पर आए हर संकट में इन विधायकों ने सीएम गहलोत का साथ दिया है लेकिन धीरे-धीरे सरकार के साथ ही संगठन में बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों को अहम पद देने से कांग्रेस में भी नाराजगी के सुर उठे हैं. कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं ने संगठन से जुड़े कार्यों में इन विधायकों को आगे रखने पर नाराजगी जाहिर की है और इन क्षेत्रों से आने वाले कांग्रेसी नेता अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित है.

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