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IIT मद्रास ने बनाया विषैली फॉर्मास्यूटिकल वेस्टवाटर को-कंपोजिटिंग

नई दिल्ली : आईआईटी मद्रास और जर्मन शोधकर्ताओं ने मिलकर एक को-कंपोजिटिंग का निर्माण किया है जो विषैले फॉर्मास्यूटिकल कीचड़ को साफ करने के काम में आएगा। अध्ययन के आधार पर भारत भर के विभिन्न गांवों में पहले से ही कंपोस्टिंग सुविधाओं की स्थापना की गई है जिसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाली खाद 20 दिनों के भीतर प्राप्त की जा सकती है।

सेप्टेज प्रबंधन के लिए और अधिक सुविधाएं स्थापित करने के लिए भारत सरकार के साथ अनुसंधान दल की चर्चा जारी है। अध्ययन का प्रारंभिक उद्देश्य यह समझना था कि फार्मास्यूटिकल्स और व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद खाद प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करते हैं। अध्ययन में प्राप्त परिणामों से यह निष्कर्ष निकला कि को-कंपोजिंटिंग का प्रयोग कर विषैले वेस्टवाटर कीचड़ को शोधित किया जा सकता है।

इस टीम में आईआईटी मद्रास के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफसर और शोध टीम की प्रमुख लिजी फिलिप, आईआईटी मद्रास की अनु राशेल और स्टुडगार्ड यूनिवर्सिटी, जर्मनी के इंस्टीट्यूट फॉर सेनेटरी इंजीनियरिंग, वाटर क्वलिटी और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मार्टिन क्रॉनेर्ट शामिल थे। इस अध्ययन को हाल में वेस्ट मैनेजमेंट के जनरल में प्रकाशित किया गया है।

आईआईटी मद्रास के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफसर और शोध टीम की प्रमुख लिजी फिलिप ने बताया कि भले ही फार्मास्यूटिकल्स और व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद बायोडिग्रेडेशन के लिए कम संवेदनशील हों।मिश्रित कार्बनिक अपशिष्ट और कॉयर पिथ (बल्किंग एजेंट) के अलावा सेप्टेज खाद के दौरान महत्वपूर्ण कार्बामाज़ेपाइन हटाने के लिए उपयुक्त अनुकूल वातावरण प्रदान किया गया। ऐसे में सेप्टेज प्रबंधन के लिए को-कंपोजिंटिंग को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा सकता है।

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