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गृह मंत्रालय ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी का FCRA लाइसेंस किया बहाल

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मदर टेरेसा के मिशनरीज ऑफ चैरिटी के विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम पंजीकरण (FCRA Registration) को फिर से बहाल कर दिया है. इसका मतलब यह है कि संगठन अब विदेश से फंड (Foreign Fundings) प्राप्त कर सकेगा और बैंकों में पड़े पैसों का भी लाभ उठा सकेगा. मिशनरीज ऑफ चैरिटी (Missionaries of Charity) एक कैथोलिक धार्मिक मण्डली है जिसकी स्थापना 1950 में नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा (Mother Teresa) ने गरीबों और बेसहारा लोगों की मदद करने के लिए की थी.

गृह मंत्रालय ने 25 दिसंबर को एफसीआरए पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए मदर टेरेसा द्वारा कोलकाता में स्थापित ‘‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’’ के आवेदन को पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करने के कारण खारिज कर दिया था. गृह मंत्रालय ने एक बयान में यह भी बताया था कि उसने मिशनरीज ऑफ चैरिटी के किसी खाते से लेनदेन को नहीं रोका है, बल्कि भारतीय स्टेट बैंक ने सूचित किया है कि संस्था ने खुद बैंक को खातों पर रोक लगाने का अनुरोध किया है.

31 अक्टूबर 2021 तक वैध था पंजीकरण 

गृह मंत्रालय के इस बयान से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) सहित कई नेताओं ने दावा किया था कि केंद्र सरकार ने मदर टेरेसा द्वारा स्थापित संस्था के सभी बैंक खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी है. एफसीआरए के तहत मिशनरीज ऑफ चैरिटी का पंजीकरण 31 अक्टूबर 2021 तक वैध था. गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) ने कहा कि वैधता को 31 दिसंबर 2021 तक बढ़ाया गया था.

6,000 संगठनों के FCRA लाइसेंस हुए थे रद्द

मिशनरीज ऑफ चैरिटी की सुपीरियर-जनरल सिस्टर एम प्रेमा ने बयान जारी कर कहा था कि संगठन के एफसीआरए नवीनीकरण आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया था. लेकिन मंत्रालय की ओर से हमारे किसी भी बैंक खाते पर रोक लगाने का कोई आदेश नहीं है. उन्होंने कहा था कि हमने अपने सभी केंद्रों से कहा है कि जब तक मामले का समाधान नहीं हो जाता, तब तक किसी भी विदेशी योगदान खाते का संचालन नहीं किया जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई चूक न हो. गौरतलब है कि 1 जनवरी को लगभग 6,000 संगठनों ने अपने FCRA लाइसेंस खो दिए थे क्योंकि उनका नवीनीकरण नहीं किया गया था.

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