September 19, 2020

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समाज/संस्कृति

ब्राह्मण ग्रन्थों में ब्रह्मांड चेतना से अनुप्रेरित पितर अवधारणा 

एक दार्शनिक चिंतन डॉ.  मोहन चंद तिवारी  ‘ऐतरेय ब्राह्मण’ में सोमयाग सम्बन्धी एक सन्दर्भ वैदिक कालीन पितरों की ब्रह्मांड से सम्बंधित आध्यात्मिक

स्मृति शेष

शांति और मानवीय-चेतना के अभ्यासी आचार्य विनोबा भावे

विनोबा भावे की 125वीं जयंती  पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र एक ओर दुःस्वप्न जैसा कठोर यथार्थ और दूसरी ओर कोमल आत्म-विचार! दोनों को साथ ले कर दृढ़ता पूर्वक

समाज/संस्कृति

वैदिक पितृपूजा का ऐतिहासिक और धार्मिक विकास क्रम

धार्मिक मान्यता के अनुसार सत्य और श्रद्धा से किया गया कर्म ‘श्राद्ध’ कहलाता डा. मोहन चंद तिवारी  सामान्य तौर पर पितृपक्ष में किया जाने वाला

समसामयिक

यूसर्क द्वारा एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार

हिमांतर ब्‍योरो उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) एवं अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के संयुक्त तत्वाधान में

उत्तराखंड

धार, खाळ, खेत से सैंण तक

विजय कुमार डोभाल पहाड़ी क्षेत्र में जन्मे, पले-बढ़े, शिक्षित-दीक्षित होने के बाद यहीं रोजगार (अध्यापन- कार्य) मिलने के कारण कभी भी यहां से दूर जाने का मन ही

लोक पर्व/त्योहार

“इजा मैंले नौणि निकाई, निखाई”

घृत संक्रान्ति 16 अगस्त पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी ‘घृत संक्रान्ति’ के अवसर पर समस्त देशवासियों और खास तौर से उत्तराखण्ड वासियों को गंभीरता से विचार करना

साहित्यिक हलचल

संसारभर का दुख बाँटती महादेवी  

मीना पाण्डेय महादेवी mahadevi vermaनिशा को, धो देता राकेश चाँदनी में जब अलकें खोल, कली से कहता था मधुमास बता दो मधुमदिरा का मोल; गए तब से कितने युग बीत हुए

जल विज्ञान

“वराहमिहिर की ‘बृहत्संहिता’ में भूमिगत जलशिराओं का सिद्धान्त”

भारत की जल संस्कृति-15 डॉ. मोहन चंद तिवारी (12मार्च, 2014 को ‘उत्तराखंड संस्कृत अकादमी’, हरिद्वार द्वारा ‘आईआईटी’ रुड़की में आयोजित विज्ञान से जुड़े छात्रों

इतिहास

‘गो-बैक मेलकम हैली’ ‘भारत माता की जय’

6 सितम्बर, 1932 पौड़ी क्रान्ति के नायक-  जयानन्द ‘भारतीय’ डॉ. अरुण कुकसाल हाथ में तिरंगा उठा, नारे भी गूंज उठे,  भाग चला, लाट निज साथियों की रेल में,