April 13, 2021
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उत्तराखंड

उत्तराखंड समाज/संस्कृति हिमालयी राज्य

यमुना घाटी: बूंदो की संस्कृति का पर्याय

उत्तराखंड के प्रत्येक गांव की अपनी एक जल संस्कृति हैं. यहां किसी न किसी गांव में एक स्रोत का पानी आपको जरूर मिलेगा,जिसकी अपनी एक परम्परा होती है, संस्कृति होती है। उसका वर्णन वहां किसी न किसी देवात्मा से जुड़ा मिलता है। यमुना घाटी के ऐसे ही कुछ जल स्रोतों के बारे में बता रहे […]
अभिनव पहल उत्तराखंड हिमालयी राज्य

उत्तराखंड में बेहतर रोजगार का जरिया हो सकती है केसर की खेती!

जे. पी. मैठाणी आजकल आप नकली केसर यानी कुसुम के कंटीले फूलों के बारे में भी ये सुनते हैं की ये केसर है लेकिन सावधान रहिये. ये नकली है इसके झाड़ीनुमा पौधो पर गुच्छों में उगने वाले फूलों को सुखकर केसर जैसा रंग निकलता है. इसलिए कृपया सावधान रहिये! जैसे ही हम केसर का नाम […]
इतिहास उत्तराखंड संस्मरण हिमालयी राज्य

सागर से शिखर तक का अग्रदूत

चारु तिवारी स्वामी मन्मथन जी की पुण्यतिथि पर विशेष। हमने ‘क्रियेटिव उत्तराखंड-म्यर पहाड़’ की ओर से हमेशा याद किया। हमने श्रीनगर में उनका पोस्टर भी जारी किया था। उन्हें याद करते हुये- हे ज्योति पुत्र! तेरा वज्र जहां-जहां गिरा ढहती कई दीवारें भय की स्वार्थ की, अह्म की, अकर्मण्यता की तू विद्युत सा कौंधा और […]
इतिहास उत्तराखंड संस्मरण हिमालयी राज्य

सामूहिक और सांस्कृतिक चेतना का मेला- स्याल्दे बिखौती

चारु तिवारी । सुप्रसिद्ध स्याल्दे-बिखौती मेला विशेष । सत्तर का दशक। 1974-75 का समय। हम बहुत छोटे थे। द्वाराहाट को जानते ही कितना थे। इतना सा कि यहां मिशन इंटर कॉलेज के मैदान में डिस्ट्रिक रैली होती थी। हमें लगता था ओलंपिंक में आ गये। विशाल मैदान में फहराते कई रंग के झंडे। चूने से लाइन […]
अभिनव पहल उत्तराखंड समाज/संस्कृति हिमालयी राज्य

सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण का अनूठा प्रयास

दिनेश रावत रवाँई लोक महोत्सव ऐसे युवाओं की सोच व सक्रियता का प्रतिफल है, जो शारीरिक रूप से किन्हीं कारणों के चलते अपनी माटी व मुल्क से दूर हैं, मगर रवाँई उनकी सांसों में रचा-बसा है। रवाँई के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भाषाई वैशिष्ट को संरक्षित एवं सवंर्धित करने सउद्देश्य प्रति वर्ष महोत्सव का आयोजन किया […]
उत्तराखंड संस्मरण साहित्यिक हलचल

उनके जाने का अर्थ एक समय का कुछ पल ठहर जाना

डॉ. हेमचन्द्र सकलानी जब भी उनको फोन करता तो बड़ी देर तक उनके आशीर्वादों की झड़ी लगी रहती थी जो मेरी अंतरात्मा तक को भिगो जाती थी। वो उत्तराखंड की वास्तव में अनोखी ज्ञानवर्धक विभूति थीं। 6 मार्च को उत्तराखंड की विभूति वीणा पाणी जोशी जी के निधन का जब सामाचार मिला तो हतप्रभ रह […]
उत्तराखंड समाज/संस्कृति संस्मरण

पहाड़ की अनूठी परंपरा है ‘भिटौली’

दीपशिखा गुसाईं मायके से विशेष रूप से आए उपहारों को ही ‘भिटौली’ कहते हैं। जिसमें नए कपड़े, मां के हाथों  से बने कई तरह के पकवान आदि  शामिल हैं। जिन्हें लेकर भाई अपनी बहिन के घर ले जाकर उसकी कुशल क्षेम पूछता है। एक तरफ से यह त्यौहार भाई और बहिन के असीम प्यार का […]
उत्तराखंड पर्यावरण समाज/संस्कृति

मेरी फूलदेई मेरा बचपन 

प्रकाश चंद्र पहाड़ का जीवन, सुख- दुःख और हर्षोउल्लास सब समाया होता है। जीवन का उत्सव प्रकृति का उत्सव है और प्रकृति, जीवन का अविभाज्य अंग। इसलिए पहाड़ी जीवन के रंग में प्रकृति का रंग घुला होता है। बिना प्रकृति के न जीवन है न कोई उत्सव और त्यौहार। पहाड़ों की रौनक उसके जीवन में […]
इतिहास उत्तराखंड हिमालयी राज्य

बैराट खाई: जहां आज भी हैं राजा विराट के महल का खंडहर

मत्स्य देश यहां पांडवों ने बिताया था एक वर्ष का अज्ञातवास स्व. राजेंद्र सिंह राणा ‘नयन’ देहरादून जिले के पर्वतीय क्षेत्र जौनसार परगने में बैराट खाई नामक एक स्थान है। यह स्थान मसूरी-चकराता मार्ग पर मसूरी से 50 किमी., चकराता से 23 किमी. तथा हल्के वाहन मार्ग पर हरिपुर-कालसी से 30 किमी. की दूरी पर है। […]
उत्तराखंड समाज/संस्कृति संस्मरण

बानर गीज गो…

नीलम पांडेय ‘नील’ रामनगर, भाभर के जंगलों में जड़ी बूटी खोजते हुए मेरी माकोट की आमा मालू की उझली हुई बेलों से कभी-कभी उसके फल भी तोड़ती थी। कहती थी मालू की झाल में बंदर और भालू रहते हैं क्योंकि इसके अंदर धूप, सर्दी, पानी का असर कम होता है। मालू का फल जो कि […]