August 7, 2020
Home हिमालयी राज्य Archive by category उत्तराखंड

उत्तराखंड

उत्तराखंड

संकट में सीमांत

सुमन जोशी बरसात का मौसम है. खिड़कियों के शीशों पर पड़ी बूंदों को देखते हुए अदरक-इलायची वाली चाय की चुस्कियों के बीच अपनी पसंदीदा किताब पढ़ने के दिन. और उसी के साथ म्यूजिक स्टोर से, “रिम-झिम गिरे सावन,  सुलग-सुलग जाए मन,  भीगे आज इस मौसम में,  लगी कैसी ये अगन”. गीत सुनते-सुनते कहीं
उत्तराखंड

… जब दो लोगों की दुश्मनी दो गांवों में बदल गई!

सीतलू नाणसेऊ- खाटा ‘खशिया’ फकीरा सिहं चौहान स्नेही रुक जाओ! हक्कु, इन बेजुबान जानवरों को  इतनी क्रूरता से मत मारो. सीतलू हांफ्ता-हांफ्ता हक्कु के नजदीक पहुंचा. मगर हक्कु के आंखो पर तो  दुष्टता सवार थी. हक्कु भेड़ों तथा उनके नादान बच्चों पर  ताबड़तोड़ काथ के छिठे (डंडे) बरसा रहा था. सीतलू ने हक्कु का पंजा […]
उत्तराखंड

अमर शहीद श्रीदेव सुमन के बलिदान दिवस पर उन्हें नमन करते हुए

टिहरी बांध बनने में शिल्पकार समाज के जीवन संघर्षों का रेखांकन, साहित्यकार ‘बचन सिंह नेगी’ का मार्मिक उपन्यास ‘डूबता शहर’ डॉ.  अरुण कुकसाल “…शेरू भाई! यदि इस टिहरी को डूबना है तो ये लोग मकान क्यों बनाये जा रहे हैं. शेरू हंसा ‘चैतू! यही तो निन्यानवे का चक्कर है, जिन लोगों के पास पैसा है, […]
उत्तराखंड

राज्य मिलने के बीस साल बाद भी उपेक्षित है जालली सुरेग्वेल क्षेत्र

डॉ. मोहन चन्द तिवारी अभी हाल ही में 22, जुलाई, 2020 को जालली क्षेत्र के सक्रिय कार्यकर्त्ता और समाजसेवी भैरब सती ने अमरनाथ, ग्राम प्रधान जालली; मनोज रावत, ग्राम प्रधान ईड़ा; सरपंच दीन दयाल काण्डपाल, मोहन काण्डपाल, नन्दन सिंह, गोपाल दत, पानदेव व महेश चन्द्र जोशी आदि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के एक शिष्टमंडल की अगुवाई […]
उत्तराखंड

बादल फटने की त्रासदी से कब तक संत्रस्त रहेगा उत्तराखंड?

डॉ. मोहन चन्द तिवारी उत्तराखंड इन दिनों पिछले सालों की तरह लगातार बादल फटने और भारी बारिश की वजह से मुसीबत के दौर से गुजर रहा है.हाल ही में 20 जुलाई को पिथौरागढ़ जिले के बंगापानी सब डिवीजन में बादल फटने से 5 लोगों की मौत हो गई, कई घर जमींदोज हो गए और मलबे […]
उत्तराखंड

बहुत ही लोकप्रिय थी बेरीनाग की चाय!

‘मालदार’ दान सिंह बिष्ट प्रकाश चन्द्र पुनेठा जिला पिथौरागढ़ के पूर्व दिशा में 36 किलोमीटर दूर काली नदी के किनारे झूलाघाट नाम का कस्बा है. काली नदी हमारे देश भारत और नेपाल के मध्य अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखा का कार्य करती है. काली नदी के किनारे हमारे कस्बे को झूलाघाट कहते है. और काली नदी के […]
उत्तराखंड

जंगली कं​टीली झाड़ी से रोजगार का स्रोत बन रहा है टिमरू

कम उपजाऊ और बेकार भूमि में आसानी से उगता है उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को जंगली जानवरों से बचाव के लिए शानदार बाड़/बायोफेन्सिंग भी है टिमरू खेती-बाड़ी बचाएगा टिमरू तो रूकेगा जंगली जानवरों की वजह से होने वाला पलायन जे. पी. मैठाणी हिन्दू धर्म ग्रंथों में जिन भी पेड़-पौधों का रिश्ता पूजा-पाठ तंत्र-मंत्र […]
उत्तराखंड

‘प्यारी दीदी, अपने गांव फिर आना’

गंगोत्री गर्ब्याल डॉ. अरुण कुकसाल ‘‘प्रसिद्ध इतिहासविद् डॉ. शिव प्रसाद डबराल ने ‘उत्तराखंड के भोटांतिक’ पुस्तक में लिखा है कि यदि प्रत्येक शौका अपने संघर्षशील, व्यापारिक और घुमक्कड़ी जीवन की मात्र एक महत्वपूर्ण घटना भी अपने गमग्या (पशु) की पीठ पर लिख कर छोड़ देता तो इससे जो साहित्य विकसित होता वह साहस, संयम, संघर्ष […]
उत्तराखंड

किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है कुटकी

बेहद कड़वी, लेकिन जीवनरक्षक है कुटकी जे. पी. मैठाणी मध्य हिमालय क्षेत्र में भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान के हिमालयी क्षेत्रों में बुग्यालों में जमीन पर रेंगने वाली गाढ़े हरे रंग की वनस्पति है कुटकी. उत्तराखण्ड के हिमालयी क्षेत्र जो अधिकतर 2000 मीटर यानी 6600 फीट से ऊपर अवस्थित हैं उन बुग्यालों में कुटकी पायी […]
उत्तराखंड

हिसालू की जात बड़ी रिसालू, जाँ जाँ जाँछ उधेड़ि खाँछ

डॉ. मोहन चन्द तिवारी कुमाउंनी के आदिकवि गुमानी पंत की एक लोकप्रिय उक्ति है – “हिसालू की जात बड़ी रिसालू, जाँ जाँ जाँछ उधेड़ि खाँछ. यो बात को क्वे गटो नी माननो, दुद्याल की लात सौणी पड़ंछ.” अर्थात् हिसालू की प्रजाति बड़ी गुसैल किस्म की होती है, जहां-जहां इसका पौधा जाता है, बुरी तरह उधेड़ […]