March 8, 2021
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साहित्यिक हलचल

साहित्यिक हलचल

आदमी को भूख जिंदा रखती है

–  नीलम पांडेय “नील” ना जाने क्यों लगता है कि इस दुनिया के तमाम भूखे लोग लिखते हैं,  कविताएं या कविताओं की ही भाषा बोलते हैं। जो जितना भूखा, उसकी भूख में उतनी ही जिज्ञासाएं और उतने ही प्रश्न छिपे होते हैं। अक्सर कविताएं भी छुपी होती हैं। ताज्जुब यह भी है कि उस भूखे […]