September 21, 2020
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साहित्यिक हलचल

साहित्यिक हलचल

हम छुं पहाड़ि

कुमाऊनी कविता  अमृता पांडे हम पहाड़िनाक काथे-काथ् खाणपिणे की नि कौ बात् ठुल्ल गिलास में भरि चाहा कत्तु गज्जब हुनि हम पहाड़ी आहा, कप में चाहा पि जै नि लागें गिलास में मांगनूं चुड़कन चाहा ककड़ी को रैत, झलमल राई लूण,हल्द,मिर्च लै मिलायी पूरी ,आलू टमाटर सब्जी़ दगड़ खाई मस्तमौला भयां हम पहाड़ी.
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गढ़वाली रंगमंच व सिनेमा के बेजोड़ नायक :  बलराज नेगी

जन्मदिन (30 जून)  पर विशेष महाबीर रवांल्टा गढ़वाली फिल्मों के जाने माने अभिनेता और रंगकर्मी बलराज नेगी का जन्म 30 जून 1960 को चमोली जिले के भगवती (नारायणबगड़) गांव के इन्द्र सिंह नेगी व धर्मा देवी के घर में हुआ था.सात भाई और दो बहिनों के परिवार में वे चौथे स्थान पर थे. आपके पिता […]
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‘दुदबोलि’ के रचना शिल्पी, साहित्यकार और समलोचक मथुरादत्त मठपाल

80वें जन्मदिन पर विशेष डा. मोहन चंद तिवारी 29 जून को जाने माने कुमाऊंनी साहित्यकार श्रद्धेय मथुरादत्त मठपाल जी का जन्मदिन है. उत्तराखंड के इस महान शब्दशिल्पी,रचनाकार और कुमाउनी दुदबोलि को भाषापरक साहित्य के रूप में पहचान दिलाने वाले ऋषिकल्प भाषाविद श्री मथुरादत्त मठपाल जी का व्यक्तित्व और कृतित्व उत्तराखंड के साहित्य सृजन के क्षेत्र […]
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निस्पृह प्रेमगाथा की शानदार प्रस्तुति

पुस्तक समीक्षा दिनेश रावत ‘एक प्रेमकथा का अंत’ महाबीर रवांल्टा की नवीन प्रकाशित नाट्य कृति है, जिसका ताना—बाना लोक की भावभूमि पर बुना गया है. गजू—मलारी की निश्चल प्रेमगाथा जहाँ नाटक की सुघट आत्मा है तो परिवेश और प्रचलित शब्दावली सौष्ठव. निश्चित ही ये गजू—मलारी की वही प्रेमगाथा है जिसे कभी प्रेम की पराकाष्ठा तय […]
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वो गाँव की लड़की

एम. जोशी हिमानी गाँव उसकी आत्मा में इस कदर धंस गया है कि शहर की चकाचौंध भी उसे कभी अपने अंधेरे गाँव से निकाल नहीं पाई है वो गाँव की लड़की बड़ी बेढब सी है खाती है शहर का ओढ़ती है शहर को फिर भी गाती है गाँव को उसके गमले में लगा पीपल बरगद […]
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आपका बंटी: एक समझ

पुस्तक समीक्षा  डॉ पूरन जोशी  आपका बंटी उपन्यास प्रसिद्ध उपन्यासकार कहानीकार मनु भंडारी द्वारा रचित है. मनु भंडारी, उनीस सौ पचास के बाद जो नई कहानी का आंदोलन हमारे देश में शुरू हुआ उसकी एक सशक्त अग्रगामियों में से हैं. कमलेश्वर, राजेंद्र यादव, भीष्म साहनी के साथ उनका नाम एक प्रमुख स्तंभ के रूप में […]
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लॉक डाउन से पहले मिले बड़े लेखक का बड़ा इंटरव्यू

ललित फुलारा धैर्य से पढ़ना पिछली बार हिमांतर पर आपने ‘ईमानदार समीक्षा’ पढ़ी होगी. अब वक्त है ‘बड़े लेखक’ का साक्षात्कार पढ़ने का. लेखक बहुत बड़े हैं. धैर्य से पढ़ना. लेखक बिरादरी की बात है. तीन-चार पुरस्कार झटक चुके हैं. राजनीतिज्ञों के बीच ठीक-ठाक धाक है. सोशल मीडिया पर चेलो-चपाटों की भरमार. संपादकों से ठसक […]
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‘आसमान की किताब’ और ‘घुघूति-बासूति’

व्योमेश जुगरान हाल में दो ई-किताबों से सुखद सामना हुआ– ‘आसमान की किताबः बसंत में आकाश दर्शन’ और ‘घुघूति-बासूति’. संयोग से दोनों की विषयवस्तु बच्चों से संबंधित है और दोनों ही कृतियों का यह पहला भाग है. लेखक आशुतोष उपाध्याय और हेम पन्त अपनी-अपनी क्षमताओं के अनुसार स्वयंसेवी ढ़ंग से बाल विकास व बाल शिक्षण […]
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मोटा बांस भालू बांस

जे. पी. मैठाणी सड़क किनारे उस मोटे बांस की पत्तियों को तेज धूप में मैंने, नीली छतरी के नीचे मुस्कुराते, हिलते-डुलते, नाचते-गाते देखा। ये बांस बहुत उपयोगी है- वैज्ञानिक नाम इसका डेंड्राकैलामस जाइगेंटिस हुआ ये पोएसी परिवार से ताल्लुक रखता है। आम बोलचाल में इसे मोटा बांस कहते हैं, सिक्किम की तरफ भालू बांस, असम […]
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एक लेखक की व्यथा…

ललित फुलारा कल एक होनहार और उभरते हुए लेखक से बातचीत हो रही थी. उदय प्रकाश और प्रभात रंजन की चर्चित/नीचतापूर्ण लड़ाई पर मैंने कुछ लिखा, तो उसने संपर्क किया. शायद उसे मेरे लेखक होने का भ्रम रहा हो. उसकी बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर किया. उसने कहा, ‘मैं लिखने के लिए ही जी […]