October 20, 2020
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साहित्यिक हलचल

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प्रेमचंद के स्त्री पात्र एवं आधुनिक संदर्भ

प्रेमचंद जी की पुण्यतिथि (8 अक्टूबर) पर विशेष डॉ. अमिता प्रकाश 08 अक्टूबर आज प्रेमचंद को because याद करने का विशेष दिन है. आज उपन्यास विधा के युगपुरुष एवं महान कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि है. 31 जुलाई के दिन प्रेमचंद ने लमही में एक फटेहाल परिवार में जन्म लेकर तत्कालीन फटेहाल भारत को
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घासी, रवीश कुमार, और लिट्टी-चौखा

ललित फुलारा एक बार मैं घासी के साथ रिक्शे पर बैठकर जा रहा था. हम दोनों एक मुद्दे को लपकते और दूसरे को छोड़ते हुए बातचीत में मग्न थे. तभी पता नहीं उसे क्या हुआ? नाक की तरफ आती हुई becauseअपनी भेंगी आंख से मेरी ओर देखते हुए बोला ‘गुरुजी कॉलेज भी खत्म होने वाला […]
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संसारभर का दुख बाँटती महादेवी  

मीना पाण्डेय महादेवी mahadevi vermaनिशा को, धो देता राकेश चाँदनी में जब अलकें खोल, कली से कहता था मधुमास बता दो मधुमदिरा का मोल; गए तब से कितने युग बीत हुए कितने दीपक निर्वाण! नहीं पर मैंने पाया सीख तुम्हारा सा मनमोहन गान. महादेवी महादेवी जितनी छायावाद की एक महान कवयित्री के रूप में महत्वपूर्ण […]
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जब सांझ ढले : प्रकृति और प्रेम की जीवंत पहाड़ी कविताएं

शम्भूदत्त सती का कविता संग्रह, ‘जब सांझ ढले’, हिंदी अकादमी, 2005 डॉ. मोहन चंद तिवारी कुमाउनी साहित्य के रचनाकार शम्भूदत्त सती जी के उपन्यास ‘ओ इजा’ की पिछले  लेखों में चर्चा की जा चुकी है. इस लेख में उनके कविता संग्रह ‘जब सांझ ढले’ की चर्चा की जा रही है. उनका यह कविता संग्रह सन् […]
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इजा! नि थामि तेरी कईकई, सब जगां रई तेरी नराई

(शम्भूदत्त सती का व्यक्तित्व व कृतित्व-3) डॉ. मोहन चंद तिवारी कुमाऊं के यशस्वी साहित्यकार शम्भूदत्त सती की रचनाधर्मिता से पहाड़ के स्थानीय लोग प्रायः कम ही परिचित हैं किन्तु पिछले तीन दशकों से हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक आंचलिक कुमाऊंनी साहित्यकार के रूप में सती जी ने अपनी एक खास पहचान बनाई है. शम्भूदत्त […]
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‘ओ इजा’ उपन्यास में कल्पित इतिहास चेतना और पहाड़ की लोक संस्कृति

शम्भूदत्त सती का व्यक्तित्व व कृतित्व-2 डॉ. मोहन चन्द तिवारी पिछले लेख में शम्भूदत्त सती जी के ‘ओ इजा’ उपन्यास में नारी विमर्श से सम्बंधित चर्चा की गई थी. इस उपन्यास का एक दूसरा खास पहलू पहाड़ के लोगों की इतिहास चेतना और लोक संस्कृति से भी जुड़ा है,जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है. […]
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सुन रहे हो प्रेमचंद! मैं विशेषज्ञ बोल रहा हूँ

प्रकाश उप्रेती पिछले कई दिनों से आभासी दुनिया की दीवारें प्रेमचंद के विशेषज्ञों से पटी पड़ी हैं. इधर तीन दिनों से तो तिल भर रखने की जगह भी नहीं बची है. एक से बढ़कर एक विशेषज्ञ हैं. नवजात से लेकर वयोवृद्ध विशेषज्ञों की खेप आ गई है. गौर से देखने पर मालूम हुआ कि इनमें […]
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विश्व-साहित्य के युगनायक- प्रेमचन्द, गोर्की और लू शुन 

मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिन पर विशेष डॉ. अरुण कुकसाल प्रेमचंद, गोर्की और लू शुन तीन महान साहित्यकार, कलाकार और चिंतक. जीवनभर अभावों में रहते हुए अध्ययन, मनन, चिन्तन और लेखन के जरिए बीसवीं सदी के विश्व-साहित्य के युगनायक बने. एक जैसे जीवन संघर्षों के कारण तीनों वैचारिक साम्यता, स्वभाव और व्यवहार के भी करीब थे. […]