January 20, 2021
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समाज/संस्कृति

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नोएडा में जोरों पर है श्रीराम मंदिर समर्पण निधि अभियान, घर-घर संपर्क कर रहे हैं स्वयं सेवक

हिमांतर ब्यूरो, नोएडा  अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए शुक्रवार से ही देशभर में श्रीराम मंदिर समर्पण निधि अभियान की शुरुआत हो चुकी है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों के कार्यकर्ता घर-घर संपर्क अभियान के जरिए राम मंदिर के निर्माण के लिए सहयोग राशि
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क्या है जन्म-जन्मान्तर और सात जन्मों के रिश्ते की सच्चाई?

भुवन चन्द्र पन्त जब स्त्री व पुरूष वैवाहिक सूत्र में बंधते हैं तो सनातन संस्कृति में इसे जन्म-जन्मान्तर का बन्धन अथवा सात जन्मों का बन्धन कहा जाता है. अगर कोई ये कहे कि हां, यह बात शत-प्रतिशत सही है तो संभव है कि उसे दकियानूसी ठहरा दिया जाय. because वर्तमान दौर वैज्ञानिक सोच का है, […]
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नव वर्ष 2021 हरिद्वार कुम्भ का भी लोकमंगलकारी वर्ष है

डॉ. मोहन चंद तिवारी प्रति वर्ष 31 दिसंबर को काल की एक वर्त्तमान पर्याय रात्रि 12 बजे अपने अंत की ओर अग्रसर होती है तो दूसरी पर्याय नए वर्ष के रूप में पदार्पण भी करती है.काल के इसी संक्रमण की वेला को अंग्रेजी केलेंडर के अनुसार नववर्ष का आगमन माना जाता है. इस बार नव […]
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नदी कभी वापस नहीं लौटती…

पुरातन वर्ष एक दस्तावेज़ भी है हमारे अनुभव हमारी स्मृतियों का जिसमें अनगिनत अनगढा, अनसुलझा, so कुछ तुर्श, कुछ सड़ा-गला, कुछ थोड़ा बहुत उपयोगी भी है यह हमें तय करना है कि नवीनता की ड्योढी पर हमें क्या-क्या साथ लेकर पांव रखना है. सुनीता भट्ट पैन्यूली समय धारा प्रवाह बहती because अविरल नदी है जिसकी […]
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नागरिकों को नैतिक होने के लिए सूचित करने की आवश्यकता…

सलिल सरोज महात्मा गांधी ने महसूस किया कि शिक्षा से न केवल ज्ञान में वृद्धि होनी चाहिए बल्कि हृदय और साथ में संस्कृति का भी विकास होना चाहिए. गांधी हमेशा से और हित चरित्र because निर्माण के पक्ष में थे. चरित्र निर्माण के बिना शिक्षा उसके अनुसार शिक्षा नहीं थी. उन्होंने एक मजबूत चरित्र को एक […]
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आज भी प्रासंगिक हैं ‘गांधी-गीता’ के प्रजातांत्रिक मूल्य

डॉ. मोहन चंद तिवारी प्रोफेसर इन्द्र की ‘गांधी-गीता’ दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के स्नातक स्तर के ‘भारतीय राष्ट्रवाद’ के पाठ्यक्रम में निर्धारित एक महत्त्वपूर्ण रचना है. यह पुस्तक सन् 1950 में प्रकाशित हुई थी जो अब दुर्लभप्राय है.मैं अपने फेसबुक पर गांधी जयंती, गणतंत्र दिवस स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय महोत्सवों के अवसर पर because […]
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जब एक रानी ने अपने सतीत्व की रक्षा के लिए धर लिया था शिला रूप!

देश ही नहीं विदेशों में भी धमाल मचा रही है रंगीली पिछौड़ी… आशिता डोभाल उत्तराखंड में दोनों मंडल गढ़वाल so और कुमाऊं अपनी—अपनी संस्कृति के लिए जाने जाते हैं. हम जब बात करते हैं अपने पारंपरिक परिधानों की तो हर जिले और हर विकासखंड का या यूं कहें कि हर एक क्षेत्र में थोड़ा भिन्नता […]
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पर्वतीय जीवन शैली के अभिन्न अंग हैं उरख्यालि और गंज्यालि

विजय कुमार डोभाल हमारे पहाड़ी दैनिक-जीवन में भरण-पोषण की पूर्त्ति के लिये हथचक्की (जंदिरि) और ओखली मूस (उरख्यलि-गंज्यालि) से कूटने-पीसने की प्रक्रिया सनातनकाल से चली आ रही है. because यह भी कहा जा सकता है कि ये हमारे पर्वतीय जीवन शैली के अभिन्न अंग हैं, जिनके बिना जीवन कठिन है.ओखल-मूसल और हथचक्की प्राचीन प्रोद्यौगिकी के […]
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अपने बच्‍चों को पढ़ाएं नैतिक शिक्षा का पाठ

कैसे बनता है कोई समाज, कौन हैं ये लोग? डॉ. दीपा चौहान राणा बिना किसी व्यक्ति विशेष के किसी समाज का निर्माण नहीं हो सकता है. हम मानव ही सभी समाज की नींव हैं. लेकिन इसी समाज में हमें सामाजिक बुराई देखने को मिलती है, एक से एक घिनौनी कुरीतियां तब से becauseचली आ रही […]
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बड़ी खूबसूरती से निरूपित किया है जैव विविधता के सन्तुलन को सनातनी परम्परा में

भुवन चन्द्र पन्त प्रारम्भिक स्तर की कक्षाओं के पाठ्यक्रम में बेसिक हिन्दी रीडर में एक पाठ हुआ करता था, जिसका शीर्षक अक्षरक्षः तो स्मरण नहीं हो पा रहा है, कुछ यों था कि वनस्पति एवं जीव-जन्तु परस्पर एक दूसरे पर निर्भर हैं. तब जैव विविधता जैसे शब्द नहीं खोजे गये थे, लेकिन जिस खूबसूरती से […]